खास बात यह भी है कि शिअद की परंपरा के अनुसार, जनरल हाउस में एसजीपीसी प्रधान के लिए नाम तय होता है और पार्टी के सदस्य उसी उम्मीदवार का समर्थन भी करते हैं। चूंकि बीबी जागीर कौर खुद इस प्रक्रिया से तीन बार गुजर चुकी हैं, लेकिन इस बार उन्होंने इसी परंपरा का खुला विरोध कर एसजीपीसी प्रधान के चयन के तरीके को ‘लिफाफा कल्चर’ का नाम दिया है। उनका कहना है कि बादलों द्वारा लिफाफे से जिसका नाम निकाला जाता है, उसी को एसजीपीसी का अध्यक्ष बना दिया जाता है। अब यह परंपरा बंद होनी चाहिए।
एसजीपीसी की पहली महिला अध्यक्ष बनीं
बीबी जागीर कौर शिअद की सक्र्रिय नेता रही हैं। वह 1995 में पार्टी में शामिल हुईं और इसके तुरंत बाद पार्टी की कार्यसमिति की सदस्य बन गईं। 1997 में उन्होंने भुलत्थ विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीता और उन्हें प्रकाश सिंह बादल मंत्रिमंडल में सामाजिक कल्याण, महिला विकास एवं बाल कल्याण विभाग के अलावा पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामलों की मंत्री नियुक्त किया गया।
एसजीपीसी की अध्यक्ष बनने पर उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। बीबी जागीर कौर एसजीपीसी की अध्यक्ष चुनी जाने वाली पहली महिला भी हैं। वह मार्च 1999 से नवंबर 2000 तक इस पद पर रहीं लेकिन बेटी की हत्या में शामिल होने का आरोप लगने पर उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया था।