पंजाब में 2022 के विधानसभा चुनाव की आहट होते ही सियासी समीकरण बदलने शुरू हो गए हैं। भाजपा से गठबंधन तोड़ चुकी शिरोमणि अकाली दल अब बहुजन समाज पार्टी साथ में चुनाव लड़ेगी। शिअद प्रधान सुखबीर सिंह बादल और बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने चंडीगढ़ में शनिवार को इस नए गठबंधन की सार्वजनिक घोषणा कर दी। 25 साल पहले दोनों दल पंजाब में गठबंधन कर साथ चुनाव लड़ चुके हैं।
1996 के लोकसभा चुनाव में बसपा संस्थापक कांशीराम और शिअद संरक्षक प्रकाश सिंह बादल ने शिअद-बसपा का गठबंधन किया था। उस दौरान बसपा को होशियारपुर, फिल्लौर और फिरोजपुर में जीत हासिल हुई थी। एक साल बाद 1997 के विधानसभा चुनाव में यह गठबंधन टूट गया था। इसके बाद प्रकाश सिंह बादल ने भाजपा के साथ गठबंधन किया था, जो सितंबर 2020 में टूटा। अब बसपा को उम्मीद है कि शिअद के साथ गठबंधन से प्रदेश में पार्टी एक बार फिर पुराना इतिहास दोहरा सकती है।
शनिवार को चंडीगढ़ में शिअद मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में पार्टी प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने और बसपा महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने संयुक्त बयान में गठबंधन का एलान किया। सुखबीर ने कहा कि पंजाब विधानसभा चुनाव में कुल 117 सीटों में ये 20 पर बसपा चुनाव लड़ेगी और शिअद 97 सीटों पर चुनाव मैदान में उतरेगी। उन्होंने कहा कि इतिहास फिर से दोहराया जा रहा है।
पूर्व में शिअद संरक्षक और राज्य के पांच बार मुख्यमंत्री रह चुके प्रकाश सिंह बादल ने बसपा के संस्थापक कांशीराम के साथ मिलकर गठबंधन किया था। जिस दौरान लोकसभा चुनाव में रिकार्ड सीटों पर दोनों दलों के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की थी। इस बार फिर यही हालात बनेंगे और चुनाव में गठबंधन की सरकार बनेगी। शिअद प्रधान ने कहा कि अकालियों का इतिहास रहा है कि वह जिसका हाथ पकड़ते हैं, उसे कभी नहीं छोड़ते। शिअद जब भी सत्ता में आई तो राज्य के दलितों के साथ किसानों की मुश्किलों को हल करने के लिए कई योजनाएं चलाईं।
वर्तमान कांग्रेस सरकार ने उन सभी योजनाओं पर रोक लगा दी। सरकार बनते ही रुकी हुई सभी योजनाओं को शुरू किया जाएगा। राज्यसभा सांसद सतीश मिश्रा ने कहा कि पंजाब की सियासत में यह ऐतिहासिक दिन साबित होगा। दोनों दलों का यह गठबंधन पंजाब की बड़ी सियासी ताकत के रूप में उभर कर आएगा। दोनों पार्टियों ने साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ा था तो राज्य की 13 सीटों में से 11 पर जीत दर्ज की थी।
बसपा नेता ने कहा कि इस गठबंधन का मायावती को ही आना था, लेकिन संक्रमण के कारण वह नहीं आ सकीं। अकाली दल और बसपा की सोच एक जैसी है। तीन कृषि कानूनों को लेकर जो फैसला अकाली दल ने लिया है वही बसपा का है। मायावती और उन्होंने राज्यसभा में कृषि कानूनों का खुलकर विरोध किया, हरसिमरत बादल ने किसानों के समर्थन में अपना मंत्री पद भी छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में भी हम किसानों से कह चुके हैं कि हमारी सरकार आने पर इन कानूनों को लागू नहीं होने दिया जाएगा। आप पर हमला बोलते सतीश मिश्रा ने कहा कि पहले आप नेताओं ने तीनों कृषि कानूनों का समर्थन किया, लेकिन जब उन्होंने किसानों का आंदोलन देखा तो पलटी मार गए, लोगों को ऐसे दोगले लोगों से बचने की जरूरत है।
बसपा के खाते में आई 20 सीटें
राज्य की 117 सीटों में 20 सीटें बसपा के खाते में आई हैं। बसपा माझा में 5, दोआबा में 8 और मालवा में 7 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगी। श्री चमकौर साहिब, बस्सी पठाणा, महिल कलां, नवांशहर, लुधियाना नार्थ, पठानकोट, सुजानपुर, भोआ, श्री आनंदपुर साहिब, मोहाली, अमृतसर नार्थ, अमृतसर सेंट्रल, पायल, करतारपुर, जालंधर पश्चिमी, जालंधर उत्तरी, फगवाड़ा, होशियारपुर, टांडा और दसूहा विधानसभा सीट बसपा के खाते में आई है।
तालमेल के लिए बनेंगी समितियां
शिरोमणि अकाली दल प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने चुनाव में दोनों दलों के बीच बेहतर तालमेल से काम हो सके, इसके लिए तालमेल समितियों के गठन की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि जल्द ही राज्य और जिला स्तरीय समितियां बनाकर घोषणा की जाएगी।
मायावती को बादल ने दिया न्योता
पंजाब में शिअद के साथ बसपा के गठबंधन होने पर शिअद के संरक्षक पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने बसपा सुप्रीमो मायावती को बधाई दी। फोन पर बातचीत के दौरान उन्होंने मायावती को पंजाब आने का न्योता दिया। बसपा सुप्रीमो ने पूर्व मुख्यमंत्री के स्वास्थ्य के बारे में पूछा और जल्द मिलने का आश्वासन दिया।