इस बहुचर्चित गुड़िया रेप व मर्डर मामले में आरोपियों के खिलाफ कुल 52 गवाह और 198 सबूत कोर्ट में पेश किए गए। वहीं आरोपियों के बचाव में भी 198 लोगों की गवाही हुई। मामले में सभी आरोपियों के खिलाफ सीबीआई ने 22 जुलाई 2017 में केस दर्ज किया था।
वर्ष 2017 में हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के कोटखाई के बहुचर्चित गुड़िया रेप और मर्डर केस में पुलिस के आईजी जहूर जैदी समेत आठ पुलिस कर्मियों को चंडीगढ़ की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। मामला गुड़िया रेप और मर्डर केस से जुड़े सूरज कस्टोडियल डेथ केस का है।
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इस मामले में पुलिस की पूरी एसआईटी टीम को सीबीआई की विशेष अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। आईजी जहूर जैदी, डीएसपी मनोज जोशी सहित कुल आठ पुलिस कर्मियों ने इस मामले की शुरुआत में फर्जी तरीके से आरोपी बनाए गए सूरज को फंसाने की कोशिश की। सूरज को लॉकअप में इतना पीटा गया कि उसकी मौत हो गई।
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दीपक का झूठा कबूलनामा
पुलिस की तरफ से पकड़े गए दीपक उर्फ दीपू के नार्को एनालिसिस में यह भी पाया गया कि पुलिस हिरासत में उसे यातना और धमकी देकर झूठा कबूलनामा लिया गया था। सूरज सिंह से कबूलनामा निकलवाने के लिए पुलिस के टॉर्चर की पुष्टि तब हुई जब 25 जुलाई 2017 को सीबीआई की तरफ सिविल अस्पताल, ठियोग में दो गवाहों का मेडिकल टेस्ट करवाया गया, जिसमें उनके शरीर पर सात से दस दिन पुराने कई चोटों के निशान पाए गए। इसके अलावा, मृतक सूरज सिंह की पत्नी ममता देवी पुलिस हिरासत के दौरान अपने पति से मिली थी। उसने भी बताया कि सूरज सिंह को पुलिस हिरासत में टॉर्चर किया गया था।
मामले में कुल 52 गवाह
इस बहुचर्चित मामले में आरोपियों के खिलाफ कुल 52 गवाह और 198 सबूत कोर्ट में पेश किए गए। वहीं आरोपियों के बचाव में भी 198 लोगों की गवाही हुई। मामले में सभी आरोपियों के खिलाफ सीबीआई ने 22 जुलाई 2017 में केस दर्ज किया था। इसके बाद आरोपियों कि खिलाफ 25 नवंबर 2017, 10 फरवरी 2018 और 31 दिसंबर 2019 को तीन अलग-अलग तारीखों पर चार्जशीट सीबीआई की कोर्ट में फाइल की गई थी। इसके बाद 26 मार्च 2019 को सभी के खिलाफ आरोप तय किए गए थे। 01 जुलाई 2019 से साक्ष्य कोर्ट में पेश करना का सिलसिला शुरू हुआ। अब साढ़े सात साल बाद 27 जनवरी 2025 को आरोपियों को दोषी करार देते हुए सभी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
शिमला जिले के कोटखाई में 4 जुलाई 2017 को लापता हुई 16 वर्षीय छात्रा का शव कोटखाई के तांदी के जंगल में निर्वस्त्र मिला था। मामले की जांच के लिए शिमला के तत्कालीन आईजी जैदी की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की थी, जिसने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया था जिनमें नेपाल मूल का एक युवक सूरज भी शामिल था। नेपाली युवक सूरज की कोटखाई थाने में पुलिस हिरासत के दौरान लॉकअप में मौत हो गई थी। मौत का यह मामला जांच के लिए बाद में हिमाचल पुलिस ने सीबीआई को सौंप दिया था।
सीबीआई ने दुष्कर्म एवं हत्याकांड की जांच करने वाली एसआईटी के सभी सदस्यों के खिलाफ हत्या की धारा 302 सहित 330,331,348,323्र326,218,195,196,201,210बी व 330 के तहत केस दर्ज किया था। इस मामले में आईपीएस जहूर हैदर जैदी के अलावा तत्कालीन डीएसपी मनोज जोशी, पुलिस सब इंस्पेक्टर राजिंद्र सिंह, एएसआई दीप चंद शर्मा, मानक मुख्य आरक्षी मोहन लाल व सूरत सिंह, मुख्य आरक्षी रफी मोहम्मद और कांस्टेबल रनीत सतेता को नामजद किया गया। सीबीआई जांच में खुलासा हुआ कि सूरज की मौत पुलिस प्रताड़ना के कारण हुई थी।