चंडीगढ़। शर्मिता भिंडर ने नारी फर्स्ट प्रतियोगिता में ‘फियर्स एंड फियरलेस’ का खिताब जीतकर शहर का नाम रोशन किया है। मुंबई और गोवा के बीच कॉर्डेलिया क्रूज पर आयोजित इंटरनेशनल प्रतियोगिता में 129 प्रतिभागियों को शिकस्त देते हुए 51 वर्षीय शर्मिता ने खिताब जीता। इसके साथ ही भिंडर ने मॉरीशस में वर्ल्ड आइलैंड कल्चरल एंड टूरिज्म एंबेसडर पेजेंट में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए भी पात्रता प्राप्त कर ली है।
विशेष बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि अगर आपके हौसलों में जान हो तो कोई भी मंजिल पाना नामुमकिन नहीं है। महिलाओं को अपने सपनों को हासिल करने के लिए अपने आराम क्षेत्र से बाहर निकलने की जरूरत है। प्रतियोगिता का अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि नारी फर्स्ट एक नए प्रकार का अनुभव था। प्रतियोगिता कठिन थी लेकिन परिवार और दोस्तों के स्पोर्ट से मुझ में प्रतियोगिता में अपना बेस्ट करने का जोश आया। उन्होंने कहा कि वह एक बंगाली परिवार से आती हैं। उनकी मां पंजाब विश्वविद्यालय अंग्रेजी की प्रोफेसर थीं। इसके चलते उनका पूरा बचपन चंडीगढ़ में ही बीता। शर्मिता ने कहा कि आप चंडीगढ़ से तो जा सकते हैं पर चंडीगढ़ कभी आपके अंदर से कभी नहीं जाता है।
जीवन काफी चुनौतियों से भरा रहा :
उन्होंने बताया कि उनका जीवन काफी चुनौतियों से भरा रहा। वह एक विशेष बच्चे की मां बनीं, जिसके बारे में डॉक्टरों ने कहा था कि वह चल नहीं सकता या उसके मस्तिष्क का विकास धीमा हो सकता है। उनकी मेहनत रंग लाई और बेटे ने सामान्य स्कूल से पढ़ाई की। शर्मिता ने इंडोनेशिया के बाली में अपने पति को कोविड के कारण खो दिया और जब उनका निधन हुआ तो वह उनके साथ भी समय नहीं बिता पाईं।
अपने कर्तव्यों को निभाया :
शर्मिता ने जीवन में कभी हार नहीं मानी और एक अकेली मां के रूप में अपने बेटों के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाया और साल 2015 में एम्पॉवर नामक एक एनजीओ की शुरुआत की। उनकी यह एनजीओ विशेष बच्चों के अधिकारों की वकालत के लिए काम करता है और उन्हें कानूनी, चिकित्सा और भावनात्मक रूप से मदद करने के लिए पिछले नौ सालों से काम कर रही है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करेंगी भारत का नेतृत्व :
नारी फर्स्ट में शर्मिता की जीत ने उन्हें ‘द वर्ल्ड आइलैंड कल्चरल एंड टूरिज्म एंबेसडर पेजेंट’ में भारत का प्रतिनिधित्व करने का सम्मान दिलाया है, जो 31 जुलाई से 5 अगस्त तक मॉरीशस में आयोजित किया जाएगा। इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम का उद्देश्य एक अंतरराष्ट्रीय मंच के तौर पर सांस्कृतिक आदान-प्रदान और पर्यटन को बढ़ावा देना है।