अटारी-बाघा बॉर्डर पर पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुसैनीवाला सीमा स्थित संग्रहालय को बीएसएफ दिन भर पर्यटकों के देखने के लिए खोलने की योजना तैयार की है। बीएसएफ के इस संग्रहालय में शहीद-ए-आजम भगत सिंह की वह पिस्तौल भी मौजूद है, जिससे अंग्रेज अधिकारी सांडर्न्ड की हत्या हुई थी और इसी पिस्तौल को फिरोजपुर शहर के तूड़ी बाजार स्थित क्रांतिकारियों के गुप्त ठिकाने में भी भगत सिंह के पास देखी गई थी।
बॉर्डर पर पर्यटकों को घूमने-फिरने के साथ ही खाने-पीने की सुविधा का भी प्रबंध किया जा रहा है। हुसैनीवाला बॉर्डर पर भारत और पाकिस्तान के रेंजरों के बीच होने वाली रिट्रीट सेरेमनी देखने के लिए फिलहाल पंजाब के दर्शकों की संख्या ज्यादा होती है। बीएसएफ पंजाब सरकार के साथ मिलकर हुसैनीवाला बॉर्डर को पर्यटन हब के रूप में विकसित करने जा रही है, ताकि यहां भी अटारी-बाघा बॉर्डर की तरह देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच सके।
केंद्रीय मंत्री ने की थी पर्यटन हब बनाने की घोषणा
गत वर्ष वर्तमान दर्शक दीर्घा व बीएसएफ के संग्रहालय का औपचारिक उद्घाटन करने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के साथ पहुंचे सूबे के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने हुसैनीवाला बॉर्डर को पर्यटन हब बनाने के लिए दो करोड़ रुपये दिए जाने की घोषणा की थी, जिस पर अब काम शरू हो गया है, और तैयार रूपरेखा की अंतिम स्वीकृत के लिए लिए गृहमंत्रालय के पास फाईल भेजी गई है।
बीएसएफ के एक उच्चाधिकारी बताया कि हुसैनीवाला बॉर्डर को पर्यटन हबके रूप में विकसित किया जाना है, इसमें हुसैनीवाला बॉर्डर स्थित रिट्रीट सेरेमनी, बीएसएफ का संग्रहालय, शहीदों की समाधि स्थल, समाधि स्थल के नजदीक लाइट एंड साउंड, फिरोजपुर छावनी स्थित सारागढ़ी गुरुद्वारा व बरकी मेमोरियल शामिल है। इसके अलावा एतिहासिक हुसैनीवाला रेलवे स्टेशन को स्मारक के तौर पर विकसित किया जाना है। इसका मकसद देशवासियों को हुसैनीवाला बॉर्डर का महत्व बताना है।