शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) इस बार श्री गुरु तेग बहादुर जी के 400वें प्रकाश पर्व व अन्य एतिहासिक शताब्दियों के अवसर पर होने धार्मिक समागमों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को न्योता नहीं देगी। श्री आनंदपुर साहिब में गुरुद्वारा साहिबान के मैनेजरों के साथ आयोजित बैठक में एसजीपीसी की अध्यक्ष बीबी जागीर कौर ने यह फैसला किया।
बीबी जागीर कौर ने कहा कि सिख कौम समेत पंजाब, पंजाबी व पंजाबियत को सम्मान न देने वाले प्रधानमंत्री को एसजीपीसी शताब्दी समारोहों में शामिल होने का न्योता नहीं देगी। एसजीपीसी पंथक परंपराओं-मर्यादाओं के अनुसार अलग-अलग स्थानों में समारोह की अगुवाई करेगी। एसजीपीसी पंथक संस्था है, इसका फर्ज है कि श्रद्धा के साथ नतमस्तक होने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की खुले मन से सेवा की जाए।
अप्रैल, 1999 में खालसा पंथ के शताब्दी समारोह में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी शामिल हुए थे। पिछले साल श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर सुल्तानपुर लोधी में आयोजित धार्मिक समागम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए थे। शिअद से राजनीतिक संबंध टूटने के बाद एसजीपीसी की अध्यक्ष का यह निर्णय पंथक राजनीति के लिए बड़े मायने रखता है।
बीबी जागीर कौर ने गुरुद्वारा साहिबान का प्रबंध देख रहे मैनेजरों को साफ कहा कि संगत सेवा में लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उस मुलाजिम को नौकरी पर नहीं रहने दिया जाएगा, जिस पर महिलाओं के शोषण, भ्रष्टाचार, ड्यूटी में लापरवाही से काम करने एक आरोप हैं। जो भी कर्मचारी सिखों की इस महान संस्था के बारे में झूठा प्रचार करता पाया गया, उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जल्द होगी ऑडिटर की नियुक्ति
बीबी जागीर कौर ने कहा कि एसजीपीसी के दिन प्रतिदिन के खर्चों में हो रही बढ़ोतरी को कम करने के लिए प्रयास शुरू किए जाएंगे। भविष्य में किस मद पर कितनी राशि खर्च की जानी है, इसके लिए एक ऑडिटर नियुक्त किया जाएगा। याद रहे कि एसजीपीसी ने ऑडिटर एसएस कोहली को सितंबर में पदमुक्त कर दिया था।