संयुक्त अकाली दल ने मांगा कमाई का हिसाब
पूछा, टेंडरों से कितनी कमाई हुई, कहां खर्च की
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। श्री हरिमंदिर साहिब से गुरबाणी के प्रसारण का अधिकार एक विशेष चैनल तक ही सीमित रखे जाने पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) गहरे विवाद में घिरने लगी है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की ओर से उठाए गए सवाल और विपक्षी दल कांग्रेस द्वारा प्रसारण के व्यापारीकरण के विरोध के बाद अब संयुक्त अकाली दल ने मांग की है कि संबंधित चैनल जिसके मार्फत अब तक गुरबाणी का प्रसारण कराया जाता रहा है, एसजीपीसी उससे हुई आय के बारे में श्वेत पत्र जारी करे और संगत को बताया जाए कि इस आय का इस्तेमाल कहां किया गया है।
संयुक्त अकाली दल के राष्ट्रीय महासचिव दमनवीर सिंह फिल्लौर ने एसजीपीसी के अध्यक्ष को पत्र लिखकर पूछा है कि गुरबाणी के प्रसारण के एवज में चैनल से मिले पैसे का पंथ के लाभ के लिए किस तरह उपयोग किया गया है। फिल्लौर ने पत्र में लिखा है, सभी को पता है कि बादल परिवार के स्वामित्व वाले जी-नेक्स्ट मीडिया प्राइवेट लिमिटेड (पीटीसी चैनल) को किस तरह श्री हरिमंदिर साहिब से गुरबाणी प्रसारित करने का एकाधिकार दिया गया है। आरोप है कि चैनल ने गुरबाणी का व्यवसायीकरण किया और इसे बेचकर धन कमाया है। अब समय आ गया है कि इस मुद्दे पर तथ्यों को सार्वजनिक डोमेन में लाया जाए, क्योंकि व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए पवित्र गुरबाणी का उपयोग करना पाप है।
पत्र में फिल्लौर ने श्वेत पत्र जारी कर पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग करते हुए पूछा है कि क्या चैनल ने गुरबाणी का व्यावसायिक उपयोग किया और यदि ऐसा हुआ है तो चैनल ने पिछले कई वर्षों में कितना मुनाफा कमाया? फिल्लौर ने पत्र में लिखा है कि एसजीपीसी टीवी नेटवर्क के सभी तथ्यों और आंकड़ों को पेश करने का निर्देश दे सकती है, जिसे बाद में समिति द्वारा सार्वजनिक किया जा सकता है। यदि चैनल ने यह धन अपने लिए एकत्र किया है, तो एसजीपीसी को दखल देते हुए चैनल से गुरबाणी का व्यवसायीकरण करके जुटाया गया धन वापस लेना चाहिए। फिल्लौर ने पत्र में कहा है कि प्राप्त धन का उपयोग पंथ की सेवा और विकास कार्यों के लिए किया जा सकता है।
श्वेत पत्र नहीं लाया तो जा सकते हैं अदालतफिल्लौर ने लिखा है कि अगर श्वेत पत्र नहीं लाया गया तो पंजाब और पंथ के प्रतिनिधियों के पास पैसों के लेनदेन का पता लगाने के लिए अदालत या किसी प्रमुख जांच एजेंसी से संपर्क करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं होगा। उन्होंने श्री हरिमंदिर साहिब से गुरबाणी के प्रसारण के लिए जल्द ही खुली निविदाएं आमंत्रित करने के एसजीपीसी के फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि यह वास्तव में अच्छा कदम है। स्वर्ण मंदिर से गुरबाणी के प्रसारण पर एक ही चैनल के एकाधिकार को समाप्त करने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही थी। हालांकि फिल्लौर ने आशंका जताई कि निविदा खोलने में क्या एसजीपीसी पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने में सक्षम है? उन्होंने कहा कि अगर एसजीपीसी ऐसा नहीं कर सकी तो टेंडर प्रक्रिया का कोई अर्थ नहीं होगा।