अमृतसर में स्वर्ण मंदिर की 85 साल पुरानी गुरु रामदास निवास (सराय) की ऐतिहासिक इमारत पर संकट मंडरा रहा है।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) इसे तोड़कर आधुनिक सुविधाओं से लैस इमारत बनाना चाहती है, ताकि हरमंदिर साहिब पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को हाईटेक माहौल मिल सके लेकिन कई सिख संगठन इसे तोड़ने के विरोध में आ गए हैं। उनका कहना है कि यह इमारत सिख विरासत है। इसलिए इसे तोड़ना उचित नहीं। संगठनों के विरोध के बाद एसजीपीसी ने इस पर संगत की राय लेने का फैसला किया है।
एसजीपीसी अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ का कहना है कि संगत की सुविधाओं और उनकी मांग को ध्यान में रखते हुए नई इमारत बनाने का प्रस्ताव है। संगत की राय पर ही कोई फैसला लिया जाएगा। उधर, एसजीपीसी के फैसले का विरोध करने वाले सिख सद्भावना दल के प्रेसीडेंट और हरमंदिर साहिब के पूर्व रागी बलदेव सिंह वडाला कहते हैं कि इस इमारत का ऐतिहासिक महत्व है। एसजीपीसी इसे तोड़ने के बजाय इसकी मरम्मत और साज सज्जा कर इसके ऐतिहासिक महत्व को बरकरार रख सकती है।
आजादी से पहले हरमंदिर साहिब आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यही एकमात्र सराय थी। वडाला के अनुसार एसजीपीसी श्री अकाल तख्त साहिब के पीछे स्थित चार एकड़ जमीन में बनी अकाली मार्केट में नई सराय बनाकर इस ऐतिहासिक इमारत का अस्तित्व बचा सकती है। एसजीपीसी ने संगत की राय लेने की बात कही है और यदि इसके बिना कोई कदम उठाया जाता है तो वह विरासत को बचाने के लिए अदालत का रुख करेंगे। बता दें कि नई इमारत की कार सेवा का काम एसजीपीसी पहले ही बाबा कश्मीरा सिंह भूरी वाले को दे चुकी है।
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गरीबों की सराय, कमरे का शुल्क नहीं
हरमंदिर साहिब आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह सराय गरीबों की सराय के रूप में देखी जाती है। स्वर्ण मंदिर की अन्य सरायों में जहां 500-1000 रुपये प्रतिदिन किराया लगता है, वहीं इस सराय के कमरे के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता। इसमें कमरा पाने के लिए श्रद्धालुओं को सिक्योरिटी के रूप में 100 रुपये जमा करवाने होते हैं और जब वह कमरा खाली करते हैं तो उन्हें सौ रुपये लौटा दिए जाते हैं।
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इसलिए भी है खास
6 सराय में से सबसे पुरानी और बड़ी सराय
17 जनवरी, 1931 में संत साधु सिख ने रखा था नींव पत्थर
228 कमरे और 18 हॉल हैं दोमंजिला इमारत में