शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) बोर्ड के चुनाव करवाने की मांग को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में दाखिल याचिका पर केंद्र सरकार ने मंगलवार को जवाब दाखिल किया। केंद्र सरकार ने बताया कि चुनाव करवाने के लिए कमिश्नर नियुक्त करने की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। इसी बीच हाईकोर्ट ने याचिका में एसजीपीसी को पार्टी बना लिया।
अमृतसर के अजनाला निवासी बलदेव सिंह सिरसा ने एडवोकेट जतिंदरजीत कौर के माध्यम से याचिका दायर कर कहा कि एसजीपीसी बोर्ड की पांच वर्ष की अवधि समाप्त हो चुकी है। तय प्रावधानों के तहत बोर्ड का गठन पांच वर्ष के लिए किया जाता है। याचिकाकर्ता बलदेव सिंह सिरसा ने हाईकोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार द्वारा 16 दिसंबर 2011 को बोर्ड के सदस्यों के गठन की जो नोटिफिकेशन जारी की गई थी उसके तहत एसजीपीसी बोर्ड की पांच वर्षों की अवधि 16 दिसंबर 2016 को समाप्त हो चुकी है।
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया है की केंद्र सरकार ने 4 अगस्त 2011 को नोटिफिकेशन जारी कर बोर्ड के सदस्यों के चुनाव करवाने की घोषणा की थी। इस नोटिफिकेशन के तहत 18 सितंबर 2011 को बोर्ड के सदस्यों के चुनाव कराए गए थे। चुनाव के बाद केंद्र सरकार ने 16 दिसंबर 2011 को बोर्ड का गठन कर नोटिफिकेशन जारी कर दिया था।
इस दौरान सहजधारी सिख संगठन ने एसजीपीसी चुनाव में मताधिकार की मांग को लेकर याचिका दायर की थी।
उस याचिका पर हाईकोर्ट की फुल बेंच सुनवाई कर रही थी। 20 दिसंबर 2011 को हाईकोर्ट ने याचिका पर अपना फैसला सुनाते हुए केंद्र सरकार की वर्ष 2003 की वो नोटिफिकेशन रद्द कर दी थी जिसके तहत सहजधारी सिखों को मताधिकार से वंचित किया गया था। हाईकोर्ट की फुल बेंच के इस फैसले के खिलाफ एसजीपीसी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील कर दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने अपील पर अंतरिम निर्देश जारी करते हुए 16 दिसंबर को जारी वह नोटिफिकेशन, जिसके तहत बोर्ड का गठन किया गया था, उसे अंतरिम तौर पर जारी रखने के निर्देश दे दिए थे। 30 मार्च 2012 को सुप्रीम कोर्ट ने 15 सदस्यीय एक्जीक्यूटिव कमेटी के गठन के आदेश दिए थे।