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यौन उत्पीड़न नीति : पीयू जागरूकता फैलाने में असफल

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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय यौन उत्पीड़न नीति के बारे में विद्यार्थियों के बीच जागरूकता फैलाने में असफल रहा है। पीयू में कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न मामलों से निपटने के लिए पंजाब यूनिवर्सिटी कमेटी अगेंस्ट सेक्सुअल हरेसमेंट (पीयू कैश) बनाई गई है। वहीं पीयू परिसर में इसे लेकर प्रदर्शनों के बावजूद साइन बोर्ड नहीं लगवाए गए हैं। इस कारण यौन शोषण से संबंधित मामलों में कहां शिकायत करें, किसे संपर्क करें आदि बातों की विद्यार्थियों को जानकारी ही नहीं है।
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पीयू कैश के सदस्य ने नाम नहीं लिखने की शर्त पर बताया कि पीयू परिसर में यौन शोषण नीति को लेकर विद्यार्थियों और परिसर के स्टाफ में जागरूकता की कमी है। हमारे यहां महिलाएं वैसे भी यौन शोषण मामलों को लेकर जल्दी से सामने नहीं आती है। विद्यार्थियों के मध्य पीयू कैश के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए हमने शोध कर सेक्टर-14 और सेक्टर-25 परिसर में 25 मुख्य साइट देखी है, जहां साइन बोर्ड लगवाए जाएंगे। इनमें कई जगह ऐसी हैं जहां रैगिंग के साइन बोर्ड लगाए हैं, हम इन्हीं के बराबर में साइन बोर्ड लगवाने की योजना बना रहे हैं। इसके लिए हमें प्रशासनिक अधिकारियों की मदद की जरूरत है। अधिकारियों की मदद से ही हम उचित जागरूकता फैलाने में सफल हो सकते हैं।
पीयू छात्र परिषद की पूर्व महिला अध्य्क्ष कनुप्रिया ने बताया कि पीयू प्रशासन महिलाओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न को लेकर ज्यादा गंभीर नहीं है। पिछले वर्षों में हमारे कई प्रदर्शन के बाद महिला छात्रावास 3 और 4 व स्टूडेंट सेंटर पर केवल तीन जगह ही पीयू कैश को लेकर साइन बोर्ड लगवाए गए हैं। हमने कई बार मांग की है कि पीयू में मुख्य केंद्रों, विभागों और छात्रावास में पीयूकैश को लेकर साइन बोर्ड लगवाए जाएं, महिला कैसे, कहां शिकायत कर सकती है, इस बारे में पूरी जानकारी दी जाए। परिसर की छात्राएं यौन उत्पीड़न नीति के प्रति जागरूक नहीं है।
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अभी तक दफ्तर और हेल्पलाइन नहीं चली
पीयू कैश कमेटी का दफ्तर आइसर की बिल्डिंग पर अब बनाया गया है, लेकिन चालू नहीं हो पाया है। वहीं अभी तक हेल्पलाइन के लिए भी कोई लैंडलाइन नंबर नहीं शुरू किया गया है। पीयू कैश के सदस्यों का नंबर ही शिकायतकर्ता के लिए उपलब्ध करवाया जा रहा है।
90 दिनों में करना होता है शिकायत का निवारण
महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम, 2013 के तहत कमेटी की ओर से शिकायत का निवारण 90 दिनों के अंदर करना अनिवार्य है। वहीं शिकायतकर्ता को यौन उत्पीड़न की घटना के तीन महीने के अंदर शिकायत करनी जरूरी है।
कोट्स
पीयूकैश के दफ्तर को हमने एक जगह से दूसरी जगह तब्दील किया है, जल्द ही यह शुरू हो जाएगा। यौन उत्पीड़न मामलों में हेल्पलाइन के लिए पीयू कैश के सदस्यों का नंबर उपलब्ध करवाया जाता है। - प्रो विक्रम नय्यर, पीयू रजिस्ट्रार
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