किसान भवन में आयोजित किसान संगठनों से वार्ता करने पंजाब के कैबिनेट मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, सुख सरकारिया, सुखजिंदर रंधावा और मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार कैप्टन संदीप संधू पहुंचे और छह किसान नेताओं के साथ प्रदर्शन की समाप्ति को लेकर चर्चा की। उन्होंने बताया कि 19 को होने वाले विशेष विधानसभा सत्र में किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए नया अध्यादेश लाया जा रहा है। लेकिन मामले का कोई हल नहीं निकला।
राज्यपाल का भी कर सकते हैं घेराव
किसान नेताओं ने कहा कि यदि पंजाब सरकार किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए अध्यादेश लाती है तो किसान उसका समर्थन करेंगे। यदि राज्यपाल सरकार के अध्यादेश को लेकर हस्ताक्षर नहीं करेंगे तो किसान यूनियनें राज्यपाल का भी घेराव करने से पीछे नहीं हटेंगे।
शिअद ने नहीं की हमसे कोई बात
किसान नेताओं ने कहा कि राजनीतिक दल किसानों की ताकत को जान गए हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण हरसिमरत कौर बादल का केंद्रीय कैबिनेट से इस्तीफा है। नेताओं ने कहा कि अकाली दल ने अभी तक हमारे साथ बात नहीं की है, जबकि वे किसानों के पक्ष में समर्थन का अनुमान लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को किसान आंदोलन करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
भाकियू (लखोवाल) को शामिल किया
कृषि कानूनों का विरोध करने वाले किसान संगठनों ने भाकियू लखोवाल को फिर से शामिल करने का फैसला किया है। हालांकि हरिंदर सिंह लखोवाल बैठकों में शामिल नहीं हो पाएंगे। अब संगठनों की संख्या 30 हो गई है। उगराहां किसान संगठन 30 किसान यूनियनों के आंदोलन को बाहर से समर्थन दे रहा है।