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डॉक्टरों की कमी बनी जंजाल, 55 से ज्यादा पद खाली, बुलाने को हरियाणा-पंजाब को भेजा 7वां पत्र

Mon, 13 Jan 2020 02:02 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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फाइल फोटो
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डॉक्टरों की कमी जी का जंजाल बन गई है। चंडीगढ़ में 55 से ज्यादा डॉक्टरों की स्थायी पद खाली हैं। इन्हें भरने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन लगातार कोशिश कर रहा है, लेकिन यह कोशिश कामयाब होती नहीं दिख रही। चंडीगढ़ प्रशासन ने कई बार हरियाणा-पंजाब को पत्र लिखकर डॉक्टरों को डेपुटेशन पर देने की मांग की है।
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इसके लिए प्रशासन की ओर से छह बार पत्र लिखकर डॉक्टरों को भेजने का अनुरोध किया गया है। पंजाब की ओर से तो चंडीगढ़ प्रशासन को सकारात्मक जवाब मिल रहा है, मगर हरियाणा की ओर से ऐसा नहीं हो रहा है। सूत्रों ने कहा कि अब चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से फिर से सातवां पत्र भेजा गया है।

दरअसल, चंडीगढ़ में डॉक्टरों की नियुक्ति दो तरह से होती है। एक तो यूपीएससी के जरिए या फिर डेपुटेशन पर। यूपीएससी की लंबी प्रक्रिया है। इसमें काफी समय लगता है। चंडीगढ़ प्रशासन के अनुरोध पर ही पोस्टें निकली जाएंगी। हालांकि इसका भी प्रयास किया गया, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। ऐसे में डेपुटेशन का ही एक रास्ता बचता है।
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पंजाब-हरियाणा की ओर से भेजे गए डॉक्टरों को नियुक्त किया जाता है। बताया जा रहा है कि पंजाब व हरियाणा में पहले से ही डॉक्टर कम हैं। सरकारी पदों पर डॉक्टर आना नहीं चाहते। इस वजह से दोनों प्रदेश पहले से ही डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं। हालांकि पंजाब ने डॉक्टरों को सुविधाएं देने के उद्देश्य से अपने नियमों में कुछ बदलाव किए हैं लेकिन इसका व्यापक असर नहीं दिख रहा है।

डॉक्टरों की कमी का असर सीधे तौर पर नहीं दिखता है, लेकिन कहीं न कहीं काम प्रभावित होता है। सबसे ज्यादा दिक्कते एनेस्थीसिया और रेडियोलाजिस्ट पर आती है। रेग्युलर डॉक्टर न होने की वजह से चंडीगढ़ प्रशासन ऑन कॉल के आधार पर सेवा लेता है। इसका मतलब यह है कि डॉक्टरों को प्रति केस के हिसाब से मानदेय दिया जाता है। जब अस्पताल को जरूरत होगी, तभी उन्हें बुलाया जाएगा।

कुछ रेडियोलाजिस्ट प्रधानमंत्री के आह्वान पर कुछ समय के लिए मुफ्त में सेवाएं देती हैं। इससे काम चल जाता है। हालांकि चंडीगढ़ प्रशासन ने कांट्रेक्ट और एनएचएम के जरिए डॉक्टरों की कमी को पूरा कर देता है। लेकिन नियमित डॉक्टर हो तो उनके भरोसे कुछ जरूरी पहल किए जा सकते हैं, जिसका फायदा मरीजों को सीधे तौर पर मिलेगा।

डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए कांट्रैक्ट पर नियुक्तियां हो रखी हैं। कोई खास सेवाएं प्रभावित नहीं हो रही हैं, लेकिन स्थाई डॉक्टरों होंगे तो इसका फर्क तो पड़ेगा।
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- डॉ. जी दीवान, निदेशक चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग
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