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Chandigarh News: चंडीगढ़ में पांच माह में सात विद्यार्थी कर चुके हैं आत्महत्या

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चंडीगढ़। पिछले पांच महीनों में सात विद्यार्थी आत्महत्या कर जान गंवा चुके हैं। इनमें छठी में पढ़ने वाले 13 साल के किशोर से लेकर 27 वर्षीय छात्र तक शामिल है। किसी की जान कॅरिअर की चिंता ने ले ली तो किसी ने पीटीएम से एक दिन पूर्व नंबर कम आने के डर में खुदकुशी करना मुनासिब समझा। आए दिन ऐसे मामले बढ़ने से अभिभावक भी चिंता में हैं। 2024 के पहले दो महीनों में तीन विद्यार्थियों ने अपनी जान ले ली। पहले सेक्टर-42 स्थित चंडीगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट में बीएससी छात्रा ने 17 जनवरी को हॉस्टल में फंदा लगाकर जान दे दी। फरवरी माह में मौलीजागरां में आठवीं के छात्र का मामला सामने आया और तीसरा मामला मंगलवार को डीएवी कॉलेज की बीएससी छात्रा का है। इसके अलावा पीयू के एक छात्र ने हाॅस्टल में, अन्य ने नयागांव में और मनीमाजरा में भी एक छात्र ने घर पर आत्महत्या की। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की जारी रिपोर्ट के अनुसार चंडीगढ़ में साल 2021 के मुकाबले 2022 में आत्महत्या के अधिक मामले आए हैं, जिनमें कई विद्यार्थी शामिल हैं। चंडीगढ़ पुलिस से मिले डाटा के अनुसार पिछले तीन सालों में 18 वर्ष से कम आयु के 33 विद्यार्थी आत्महत्या कर चुके हैं।
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विद्यार्थियों में नहीं हो रही सुसाइडल टेंडेंसी की पहचान
आत्महत्या के पीछे के कारण चाहे अलग-अलग रहे हों लेकिन एक मूल वजह इन विद्यार्थियों में सुसाइड टेंडेंसी का पता न लगा पाना है। आत्महत्या से पूर्व विद्यार्थी डिप्रेशन या मानसिक परेशानी से गुजरता है जिसकी जल्दी पहचान हो जाए तो उनकी जान बच सकती है। पीयू समाज शास्त्र विभाग प्रमुख प्रो. विनोद कुमार ने विद्यार्थियों द्वारा ऐसे गंभीर कदम उठाने के संभवत: दो कारण बताए। पहला छात्र का खुद को सफलता के पैमाने पर असफल घोषित कर देना और दूसरा उनकी समस्या सुनने के लिए किसी व्यक्ति का न होना।

केस स्टडी 1
कॅरिअर बनाने का दबाव
अंतिम वर्ष पीयू के हॉस्टल में आत्महत्या करने वाले प्रदीप ने अपने पत्र में खुद को फेलियर लिखा था। छात्र ने महीना पहले ज्यूडिशियल परीक्षा के परिणाम आने के बाद सुसाइड किया था और सुसाइड नोट में जीवन में कुछ न कर पाने पर खुद पर शर्मिंदा होने की बात कही थी। विद्यार्थी द्वारा कही यह बातें अच्छा कॅरिअर बनाने के सामाजिक दबाव को बयां करती है।
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केस स्टडी 2
आत्महत्या का कारण टॉक्सिक रिलेशनशिप
सीआईएचएम-42 केस में छात्रा के आत्महत्या का कारण टॉक्सिक रिलेशनशिप था। अपने सुसाइड नोट में छात्रा द्वारा साथी का नाम लिखा था जिस पर कार्रवाई चल रही है। वहीं मनीमाजरा में विद्यार्थी ने पेरेंट्स टीचर मीटिंग से ठीक एक दिन पहले आत्महत्या कर दी।

ह्यूमन लाइब्रेरी रही बेनतीजा
विद्यार्थियों में अकेलापन और डिप्रेशन आदि समस्याओं को दूर करने के लिए पीयू में छात्र संगठन एनएसयूआई नवंबर 2023 में ह्यूमन लाइब्रेरी लेकर आई, जिसमें किताब की जगह विद्यार्थी दूसरे व्यक्ति के सामने अपने विचार प्रस्तुत कर सके। एनएसयूआई द्वारा केवल एक बार इसे पीयू में करवाया गया। प्रशासनिक तौर पर चंडीगढ़ के स्कूलों में 70 से अधिक और पीयू में दो काउंसलर तैनात हैं, पर कितने विद्यार्थी मदद के लिए आगे आ रहे हैं इसकी स्पष्टता नहीं है।

विभाग और हॉस्टलों में हो चाय पर चर्चा, टेबल टॉक
प्रो. विनोद ने विभागीय और हॉस्टल स्तर पर सुसाइड टेंडेंसी वाले विद्यार्थियों की पहचान के लिए कक्षा या खाने के बाद चाय पर चर्चा, टेबल टॉक करने की बात कही। हॉस्टल में सीनियर विद्यार्थियों की एक समिति सभी के साथ यह चर्चा कर सकती है और विभाग में लेक्चरर कर सकते हैं जहां हर विद्यार्थी को अपनी बात रखने का मौका मिले। साथ ही शिक्षकों और विद्यार्थियों के मेंटरशिप प्रोग्राम करवाए जाएं जिससे उन्हें किसी के डिप्रेस होने का पता लग सके और वह समय पर सही कदम ले पाएं।

सात में से चार आत्महत्या के मामलों में सात अंक की तारीख शामिल

संयोग की बात है कि सात में से चार आत्महत्या के मामलों में सात अंक की तारीख शामिल है। मनीमाजरा में 15 साल के विद्यार्थी ने सात अक्तूबर 2023 को, सीआईएचएम-42 की छात्रा ने 17 जनवरी, मौलीजागरां के 13 वर्षीय छात्र ने 17 फरवरी को और डीएवी छात्रा ने 27 फरवरी को आत्महत्या की।
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