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मगरा गोशाला में सात और गायें मरीं

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लालड़ू । प्रशासन का दावा है कि नगर काउंसिल लालड़ू में गोवंश को बचाने के लिए पुरजोर कोशिश की जा रही है पर सच्चाई कुछ और है। रविवार को मगरा गोशाला में ठंड व भूख से सात और गोवंश ने दम तोड दिया जबकि सात-आठ पशु मृत अवस्था में बिमार पड़े है।
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अमर उजाला द्वारा प्रमुखता से उठाए जा रहे मामले को लेकर हलका विधायक एनके शर्मा ने रविवार को फिर से गोशाला का दौरा किया और वहां पर गोशाला प्रबंधकों प्रति रोष जताते हुए कहा कि इस मामले को लेकर मोहाली के डीसी व डेराबस्सी के एसडीएम को मिलकर गोशाला के हालातों के बारे में बता चुके हैं पर प्रशासन ने कार्रवाई करने के बजाय अब तक सिर्फ गोशाला की देख-रेख कर रही संस्था ध्यान फांउडेशन को कारण बताओ नोटिस ही जारी किया है।
इस मौके पर शर्मा ने बताया कि प्रशासन और ध्यान फाउंडेशन ने गोवंश के बचाव के लिए खुद कोई कदम नहीं उठाया। यही नहीं उनके द्वारा शुक्रवार को भेजे गए चारे को रविवार दोपहर तक नहीं खिलाया। उन्होनें मांग कि गोशाला में मर रही गायों के जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कत्ल का मामला दर्ज किया जाए, फिर चाहे वह संस्था हो या प्रशासन। इस मौके पर एनके शर्मा ने पशुओं के लिए चारा भी काटा।
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लोग बोले- फाउंडेशन से वापस लिया जाए गोशाला का चार्ज
यही नहीं गायों की हो रही मौतों को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया, जो सबसे पहले करने वाला काम था। इसे लेकर लोगों में रोष है। उन्होने चेतावनी दी है कि अगर इस मामले में तुरंत प्रभावी कदम न उठाए तो बड़े स्तर पर संघर्ष शुरू किया जाएगा जिस की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। उन्होने मांग की कि सरकार ध्यान फांउडेशन से तुरंत गोशाला का चार्ज लेकर लालड़ू, डेराबस्सी व जीरकपुर के सैनेटरी इंस्पेक्टरों को सौंपे और फंड नगर काउंसिल जारी करे।
कोट
पिछले एक महीने से इस गोशाला में से हर रोज दो-तीन मृत पशु उठाकर ले जा रहे हैं। आज भी अब तक वे पांच मृत पशुओं ले जा चुके हैं जबकि दो और को उठाने आए हैं। -प्रेम हड्डारोड़ी ठेकेदार
कोट
हलका विधायक झूठे आरोप लगा रहे हैं। उनकी संस्था का काम सिर्फ यहां गायों की देखभाल करना है जबकि बुनियादी सुविधा देना सरकार का काम है। गोशाला में गायों की गिनती के हिसाब से और शैड डालने के लिए सरकार को बार-बार पत्र लिखे पर अब तक शेड नहीं। रही बात, अब तक मर चुके गोवंश की तो मैं जज नहीं हूं। गोवंश की मौत भूख से नहीं हुई है, वेटरिनरी डॉक्टर की बात सही नहीं है, समय आने पर जवाब दिया जाएगा। -राजू विलियम, नुमाइंदा ध्यान फाउंडेशन
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