-हरियाणा सरकार व यूटी प्रशासन ने एक सप्ताह तो पंजाब सरकार ने मांगी 15 दिन की मोहलत
-हरियाणा में 4724 तो वहीं चंडीगढ़ में 224 मामलों की जांच अभी विचाराधीन
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। बिना एफआईआर विभिन्न स्तर पर शिकायतों की लंबित जांच को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि अगली सुनवाई तक लंबित मामलों का निपटारा नहीं किया गया तो तीनों डीजीपी के खिलाफ सख्त आदेश जारी किए जाएंगे।
हाईकोर्ट के समक्ष पंजाब का एक मामला पहुंचा था जिसमें पंचकूला निवासी सुरेंद्र कुमार ने बताया था कि बिना किसी अपराध के लगातार याची के खिलाफ जांच की जा रही हैं। एक बार जांच में क्लीन चिट मिलने के बाद भी फिर से जांच बैठा दी गई। इस मामले में पंजाब सरकार से हाईकोर्ट ने बिना एफआईआर के लंबित जांच के मामलों का ब्योरा मांगा था। इसके बाद हाईकोर्ट ने हरियाणा व चंडीगढ़ को भी पक्ष बना लिया था और रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि संज्ञेय अपराध में बिना एफआईआर जांच करना कानूनी रूप से गलत है। लगातार हमारे संज्ञान में आ रहा है कि जहां संज्ञेय अपराध की कोई सूचना न हो वहां पर भी जांच विभिन्न स्तर पर की जा रही है। इस प्रकार अब इस मामले में हरियाणा व चंडीगढ़ को भी पक्ष बनाना जरूरी है।
मामला सुनवाई के लिए पहुंचा तो यूटी प्रशासन ने बताया कि 15 जून 2024 के बाद उनके पास कुल 1959 शिकायतें पहुंची और इनमें से 1735 का निपटारा किया जा चुका है। बाकी 224 शिकायतों का भी एक सप्ताह के भीतर निपटारा कर दिया जाएगा। हरियाणा सरकार ने बताया कि उनके पास वर्तमान में 4724 मामलों की जांच विचाराधीन है जिनमें एफआईआर नहीं की गई है। इन लंबित मामलों का एक सप्ताह के भीतर निपटारा कर दिया जाएगा। पंजाब सरकार ने बताया कि प्रदेश में ऐसे सभी मामलों का निपटारा 15 दिन के भीतर कर दिया जाएगा जहां शिकायत के बावजूद एफआईआर नहीं है और जांच लंबित है। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि अब आदेश का पालन करने में कोताही हुई तो तीनों डीजीपी के लिए तैयार रहें।