चंडीगढ़। करीब नौ साल पुराने कथित रिश्वत मामले में पूर्व एसडीएम (ईस्ट) शिल्पी पात्रा की कानूनी मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। अभियोजन मंजूरी को चुनौती देने वाली उनकी मूल याचिका खारिज होने के बाद अब पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पुनर्विचार याचिका भी खारिज कर दी है। साथ ही सीबीआई की विशेष अदालत में लंबित मुकदमे का जल्द निपटारा करने के निर्देश दिए हैं। मामले में शिल्पी पात्रा के अलावा उनके पति धीरज दत्त और बिचौलिये जीएस बराड़ भी आरोपित हैं।
संपत्ति विवाद से शुरू हुआ मामला
सीबीआई के अनुसार अगस्त 2017 में पंचकूला निवासी तरसेम कुमार ने सेक्टर-26 स्थित संपत्ति को लेकर अपने भाई संजय से विवाद की शिकायत दी थी। मामला तत्कालीन एसडीएम शिल्पी पात्रा की अदालत में लंबित था। आरोप है कि तीन अगस्त 2017 को शिकायतकर्ता को सुने बिना संपत्ति सील कर दी गई। इसके अगले दिन तरसेम की मुलाकात बिचौलिये जीएस बराड़ से हुई। आरोप है कि बराड़ ने काम करवाने के बदले पांच लाख रुपये की मांग की और बाद में दो लाख रुपये में सौदा तय हुआ।
घर से मिले थे दो लाख रुपये
तरसेम की शिकायत पर सीबीआई ने ट्रैप लगाया। पांच अगस्त 2017 की रात एजेंसी ने शिल्पी पात्रा के घर छापा मारा, जहां से जांच के अनुसार दो लाख रुपये बरामद हुए। इसके बाद शिल्पी पात्रा, उनके पति धीरज दत्त और जीएस बराड़ को गिरफ्तार किया गया था। हरियाणा सरकार की ओर से सीबीआई को दी गई अभियोजन मंजूरी को शिल्पी पात्रा ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मूल याचिका खारिज होने के बाद पुनर्विचार याचिका भी खारिज हो गई। अब हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सीबीआई अदालत में ट्रायल आगे बढ़ेगा।