1997 में किला रोड और सब्जी मंडी में हुए तीन सीरियल बम धमाकों का आरोपी आतंकी टुंडा को शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया गया। कड़ी सुरक्षा के बीच दिल्ली पुलिस उसे यहां लेकर पहुंची। अदालत ने गवाही के लिए 8 गवाह बुलाए थे, लेकिन एक भी नहीं पहुंचा। हां, एक गवाह की डेथ रिपोर्ट जरूर पहुंची। अगली सुनवाई के लिए 20 फरवरी, 2015 की तारीख मुकर्रर की गई है।
वहीं, दिल्ली पुलिस की टुंडा की वीडियो कांफ्रेंसिंग से पेशी की याचिका को भी अदालत ने खारिज कर दिया है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि आरोपी को लाने ले जाने में खतरा है। टुंडा पर सोनीपत और पानीपत में बम धमाकों का भी आरोप है।
शुक्रवार सुबह जिला अदालत परिसर को स्थानीय पुलिस ने पूरी तरह घेर लिया। 10 बजे दिल्ली पुलिस की टीम ने टुंडा को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश शर्मा की अदालत में पेश किया। अदालत ने 8 गवाहों को तलब किया था। इनमें से थाना शहर में दर्ज एफआईआर नंबर 70 में मेरठ निवासी प्रीतम की डेथ रिपोर्ट अदालत में पहुंचाई गई। दो अन्य गवाह सतीश निवासी भाली आनंदपुर और रमायना निवासी देवरिया, यूपी अदालत में नहीं पहुंचे। एफआईआर नंबर 71 में चार गवाहों काठमंडी निवासी धर्मवीर, इंद्रावती व सुनीता और इंद्रा मार्केट निवासी हरिओम को तलब किया गया था। लेकिन एक भी गवाह अदालत में नहीं पहुंचा।
ये है मामला
22 जनवरी 1997 को शहर के किला रोड व सब्जी मंडी में 3 बम धमाके हुए। इसमें 8 लोग घायल हुए। थाना शहर पुलिस ने दो केस दर्ज किए। अब्दुल करीम टुंडा को आरोपी बनाया गया था। आरोपी के खिलाफ 4ए, 5ए, 7ए एक्सप्लोसिव एक्ट और हत्या का प्रयास और षड्यंत्र रचने के तहत मामला दर्ज किया गया। दिल्ली पुलिस ने अगस्त 2013 में टुंडा को गिरफ्तार किया था।
दिल्ली पुलिस ने किया था खुलासा
पूछताछ के दौरान दिल्ली पुलिस ने खुलासा किया था कि टुंडा 1996 से 1998 के बीच रोहतक, दिल्ली, पानीपत, सोनीपत, लुधियाना, कानपुर और वाराणसी में हुए बम धमाकों का मास्टरमाइंड था। बम बनाते समय हुए धमाके में टुंडा अपना एक हाथ गंवा चुका है। 1997 के दौरान वह कराची, केन्या और पश्चिम एशिया के देशों में जाता रहा है।
बीते कुछ दशक में वह बांग्लादेश और पाकिस्तान में अपनी भूमिका दर्ज कराता रहा है। 2000 से 2005 तक माना जाता रहा कि टुंडा मर चुका है, लेकिन 2005 में अब्दुल रजाक मसूद की गिरफ्तारी के बाद खुलासा हुआ कि टुंडा जिंदा है।