आजादी की लड़ाई लड़ने वाले शहीद ऊधम सिंह का पासपोर्ट तत्कालीन पंजाब सरकार ने रद्द करवाया था और लंदन में अंग्रेजों के वरिष्ठ अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी थी।
इस बात का खुलासा शहीद ऊधम सिंह पर ‘भारत की आजादी की समां का परवाना महान गदरी इंकलाबी शहीद ऊधम सिंह’ पुस्तक लिखने वाले लेखक राकेश कुमार ने शहीद से संबंधित एकत्रित किए नए गुप्त दस्तावेजों के आधार पर किया है।
विदेशों में जाने से रोका था ऊधम सिंह को
लेखक राकेश कुमार ने बताया कि कई देशों में गदर लहर चल रही थी। ऊधम सिंह इन देशों में जाना चाहते थे, लेकिन पंजाब सरकार ने उन्हें इन देशों में जाने के लिए पासपोर्ट जारी करने से मना कर दिया था। ऊधम सिंह का मकसद था कि भारत को अंग्रेजों के चंगुल से मुक्त करवाना है।
लेखक का कहना है कि ऊधम सिंह अमृतसर में 30 अगस्त, 1927 को पकड़े गए थे। उसके पास से हथियार तथा गदर पार्टी से संबंधित दस्तावेज (गदर की गूंज, गदर ज्ञान आदि) बरामद हुए थे। उसे पांच साल की कैद हुई थी। पुलिस के अनुसार ऊधम सिंह ने बयान दिया था कि उसका मकसद अंग्रेजों को मारना और भारत को आजाद करवाना है।
जब ऊधम सिंह जेल से रिहा हुए तो उसके बाद उन्होंने नया पासपोर्ट जारी करने संबंधी आवेदन दिया तो पुलिस ने उन्हें गदर लहर से प्रभावित देशों में जाने से रोका। पुलिस रिकार्ड के मुताबिक ऊधम सिंह को उदय सिंह, शेर सिंह व फ्रैंक ब्राजिल के नाम से जाना जाता था।
नए आवेदन में छिपाई पुरानी पहचान
ऊधम सिंह ने नए आवेदन में अपनी पुरानी पहचान छिपाकर 20 मार्च, 1933 में लाहौर से पासपोर्ट नंबर-52753 ऊधम सिंह के नाम पर जारी करवाया और खुद को व्यवसायी बताया।
उस पासपोर्ट के जरिये ऊधम सिंह लंदन चले गए। वहां पर केस्टन हॉल में 13 मार्च, 1940 में उन्होंने चार अंग्रेज अधिकारियों पर छह गोलियां चलाई थीं। इनमें से दो गोलियां माइकल उडवायर को मारी, दो जेट लैंड को व एक लूइज डेन व एक लार्ड लेमिनटन को मारी थी।
इससे माइकल उडवायर की मौके पर ही मौत हो गई थी और बाकी तीनों जख्मी हो गए थे। ये चारों भारत में उस समय गवर्नर रह चुके थे तथा भारत की आजादी के खिलाफ थे। ऊधम सिंह को काबू कर लिया था। तब ऊधम सिंह ने पुलिस को बताया था कि उनका पासपोर्ट गुम हो चुका है।
लेखक ने बताया कि इसी पासपोर्ट को तत्कालीन पंजाब सरकार के गृह मंत्रालय लाहौर ने 11 अप्रैल, 1940 को पत्र संख्या 1999-पीई-40/1803 भारतीय सरकार के विदेश मंत्रालय नई दिल्ली को लिखा था कि पासपोर्ट रद किया जाए। पासपोर्ट रद करने के बाद अंग्रेज अधिकारियों को सूचित किया।