हरियाणा की ओर से वर्षों से उठाई जा रही अलग हाईकोर्ट की मांग पर कानून मंत्री ने किया चौंकाने वाला खुलासा। दरअसल केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री डीवी सदानंद गौडा ने कहा है कि अलग हाईकोर्ट के लिए हरियाणा ने कभी केंद्र को प्रस्ताव ही नहीं भेजा।
केंद्र अपने स्तर पर किसी भी प्रदेश के लिए अलग हाईकोर्ट की स्थापना पर विचार नहीं कर सकता। यह काम राज्य और संबंधित चीफ जस्टिस का है। केंद्रीय मंत्री शुक्रवार को यहां आगमन के दौरान पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के बार रूम में वकीलों को संबोधित करने पहुंचे थे।
पत्रकारों के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट में जजों की कमी पूरी करने के लिए फिलहाल नियुक्तियां नहीं हो सकतीं, क्योंकि कालोजियम के स्थान पर कमीशन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है और मामला विचाराधीन है।
उन्होंने कहा कि लंबित मामलों के निपटारे के लिए नेशनल लिटीगेशन पॉलिसी लाई जाएगी। देश में तीन करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं। उन्होंने यह भी बताया कि मौजूदा न्यायिक प्रणाली में सुधार की जरूरत है। न्यायिक प्रणाली में सुधार के लिए आगामी सत्र के दौरान लोकसभा में विशेष बिल भी लाया जाएगा।
वाड्रा लैंड डील पर कहा, कानून सभी के लिए बराबर
वाड्रा लैंड डील के बारे उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए एक समान है। मामले की न्यायिक आयोग जांच करेगा। भूमि अधिग्रहण बिल के बारे उन्होंने कहा कि यह किसानों के हित में है और अधिकांश किसान इसे पसंद करते हैं।
कार्यक्रम में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डाक्टर अनमोल रत्नसिंह सिद्धू ने गौड़ा का स्वागत किया। इस मौके पर पूर्व सांसद एडवोकेट सत्यपाल जैन, एजी हरियाणा बलदेव राज महाजन, भाजपा सिटी अध्यक्ष संजय टंडन मौजूद रहे।
मेगा प्रोजेक्ट पर वेंकैया नायडू से करेंगे बात
बार अध्यक्ष सिद्धू ने कानून मंत्री को बताया कि हाईकोर्ट में वकीलों की संख्या हजारों में है, लेकिन चैंबर केवल 131 हैं। पूर्व प्रशासक शिवराज पाटिल ने गेट नंबर दो के सामने तीन मंजिला पार्किंग और चार सौ चैंबर्स केनिर्माण के लिए 400 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले मेगा प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी थी, लेकिन प्रशासन इस दिशा में काम नहीं कर रहा। गौड़ा ने आश्वासन दिया कि वह 15 दिन के अंदर केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू से बात कर परिणाम बताएंगे।
सभी बार एसोसिएशस की होगी मीटिंग
केंद्री मंत्री ने कहा कि वह स्वयं वकील हैं और वकीलों की समस्याओं से बखूबी परिचित भी हैं। समस्याएं केवल यहीं नहीं, बल्कि देश के सभी वकीलों की हैं। इसलिए वे देश भर की हाईकोर्ट बार एसोसिएशस के अध्यक्षों से विशेष मुलाकात करेंगे। इसके बाद एक-एक कर समस्याएं सुलझाई जाएंगी।