चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ शिक्षकों ने सुझाव दिया है कि बिना देरी छोटे विभागों का विलय संबंधित बड़े विभागों में कर दिया जाए, क्योंकि नैक ने यह महत्वपूर्ण सुझाव दिया था। इस पर अमल होना चाहिए। अब तक देरी हुई, लेकिन अभी भी समय है। यदि रैंकिंग गिरती है तो इसका खामियाजा शिक्षक ही नहीं कर्मचारियों, छात्रों और खुद विश्वविद्यालय को भुगतना होगा।
विज्ञान, कला, वाणिज्य संकाय के वरिष्ठ शिक्षकों का एक बड़ा ग्रुप है। यह ग्रुप पीयू के बारे में सोचता है। जब कोई भी खतरा पीयू पर मंडराता है या फिर कोई गलत काम होता है तो उसके खिलाफ अपनी आवाज गोपनीय ढंग से उठाता है और उस आवाज का असर भी होता है। इसी को देखते हुए अब यह ग्रुप नैक के मानकों की समीक्षा कर रहा है। अब तक कितने मानकों पर काम किया गया, यह देखा गया। नैक ने सुझाव दिया था कि छोटे सेंटरों का विलय उनसे जुड़े बड़े विभागों में किया जाए। इससे मैनपावर का सदुपयोग हो सकेगा। पीयू ने इस पर छह साल में काम ही नहीं किया। इससे वरिष्ठ शिक्षकों में नाराजगी है। उन्होंने कहा है कि पीयू अब देरी न करे। कमेटी की ओर से भेजे गए सुझावों को देखें और उसे लागू कर दिया जाए। पीयू ने विभाग विलय के लिए कमेटी बनाई थी जिसने अपने सुझाव उच्चाधिकारियों को भेजे दिए थे। अब तक उन्हें मंजूरी नहीं मिली। हालांकि पीयू का तर्क है कि यह कार्य पाइप लाइन में है।