पद्मश्री शिल्पकार नेकचंद सैनी के शहर चंडीगढ़ में उनकी विरासत और काम को आगे बढ़ाने वाले कुछ और लोग भी हैं। इन्होंने भी वेस्ट मैटेरियल से एक नया संसार गढ़ा है। निजी सेनेटरी ठेकेदारी का कार्य करने वाले इस शख्स का नाम है विजय गोयल, जो सेक्टर-47 में रहते हैं।
इन्होंने बाथरूम और ट्वॉयलेट के वेस्ट मैटेरियल से कई कलाकृतियां बनाईं, जिन्हें संजोने के लिए यूटी प्रशासन ने कला सागर नाम से म्यूजियम ही बना दिया। ठेकेदारी के दौरान 1995-96 में विजय गोयल ने बाथरूम के खराब होने वाले सामानों से कलाकृतियां बनाने का काम घर से ही शुरू किया।
उनका यह शौक घर से कब बाहर पहुंच गया पता ही नहीं चला। वर्ष 1998 में कलाग्राम में लगी प्रदर्शनी के दौरान जब विजय गोयल ने बाथरूम फिटिंग की वेस्ट सामग्री से बनी कलाकृतियां प्रस्तुत कीं तो यूटी प्रशासन के अधिकारी भी हैरान रह गए। उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए सेक्टर-10 स्थित कलाग्राम में उनके द्वारा बनाई गईं कलाकृतियों की इन साइड और आउट साइड प्रदर्शनी लगाई गई।
इसके बाद जमीन की समस्या को दूर करने के लिए 1998 में ही सेक्टर-36 में उन्हें जमीन की गई और यहां कला सागर म्यूजियम का निर्माण कराया गया। जहां आज भी उनके द्वारा खराब बाथरूम फिटिंग से 1.5 इंच से लेकर 25 फिट बड़ी कलाकृतियां बनाई जा चुकी हैं।