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प्रापर्टी है नहीं, निगम ने अटैच करने के लिए डीसी को लिखा पत्र

Wed, 18 Jan 2017 01:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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Chandigarh DC Ajit Balaji Joshi - फोटो : File Photo
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रिकवरी चार्ज न कर पाने पर नगर निगम की ओर से डीसी को कंपनियों और डिफाल्टरों की प्रापर्टी अटैच करने की सिफारिश की गई है। लेकिन हकीकत में उन कंपनियों की शहर में कोई प्रापर्टी है ही नहीं। ऐसे में यह कार्रवाई सिर्फ कागजों तक ही सीमित है। 
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सेलवेल कंपनी के बाद नगर निगम ने एक और कंपनी आउटडोर कम्यूनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड से 87 लाख का बकाया लेने के लिए डीसी को नगर निगम कमिश्नर बी पुरुषार्था ने पत्र लिखा है। यह राशि भी विज्ञापन शुल्क बकाए से संबंधित है।

कमिश्नर ने अपने पत्र में डीसी को पंजाब लैंड रेवेन्यू एक्ट के सेक्शन 98(ए) के चैप्टर 7 के तहत कार्रवाई करने के लिए लिखा है। पत्र में कंपनी की प्रॉपर्टी अटैच करने के लिए कहा गया है, जबकि इस कंपनी की शहर में कोई प्रापर्टी नहीं है। इससे पहले सेलवेल कंपनी की प्रापर्टी अटैच करने के लिए पत्र लिखा गया था। उसकी भी शहर में कोई प्रापर्टी नहीं थी। सिर्फ मोहाली नगर निगम में एक करोड़ और चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड में 25 लाख की बैंक गारंटी है।
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लाइसेंस फीस भी नहीं ले पाया नगर निगम

चंडीगढ़ प्रशासन - फोटो : DEMO Pics
डीसी को दिल्ली बेस्ड आउटडोर कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड पर कार्रवाई के लिए डीसी को जो पत्र भेजा गया है उसमें कहा गया है कि यह 87 लाख रुपये की राशि विज्ञापन शुल्क की है जो कि कंपनी से ली जानी है। कंपनी को दो टेंडर पब्लिक टायलेट्स के अलॉट किए गए थे। जिनमें रखरखाव और रेनोवेशन का काम भी शामिल था। एक ठेका साल 2010 में 25 पब्लिक टायलेट के लिए दिया गया था, जबकि एक अन्य ठेका भी इसी साल दिया गया था जिसके तहत सेक्टर-37 का एक पब्लिक टायलेट दिया गया था। 

लाइसेंस फीस भी नहीं ले पाया नगर निगम
नगर निगम का जन स्वास्थ्य विभाग ने कंपनी से पब्लिक टायलेट्स की लाइसेंस फीस भी चार्ज नहीं कर पाया है। जिसकी राशि 96 लाख और 17 लाख से ज्यादा है। इसके लिए नगर निगम के जन स्वास्थ्य विभाग के डिवीजन नंबर-4 ने 26 नवंबर 2015 को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था लेकिन इसके बाद नगर निगम ने कोई कार्रवाई नहीं की। अधिकारयिों ने इस राशि की जानकारी कमिश्नर को भी नहीं दी है क्योंकि अगर दी होती तो जो कमिश्नर की ओर से डीसी को लिखे पत्र मे उसका भी जिक्र होता। लेकिन जो पत्र भेजा गया है कि उसमे सिर्फ 87 लाख रुपये के विज्ञापन शुल्क के बकाए का ही जिक्र है।

नगर निगम ने इस कंपनी को डिबार भी नहीं किया है जबकि सेलवेल कंपनी को दो साल के लिए डिबार कर चुकी है। नोटिस भेजे 13 माह हो चुके हैं। ऐसे में अगर विज्ञापन शुल्क और लाइसेंस फीस दोनो को जोड़ दिया जाए तो यह रिकवरी दो करोड़ से ज्यादा की हो जाती है। उधर नगर निगम के एक अधिकारी के अनुसार कंपनी की इस मामले में सुनवाई भी चल रही है। 

दो और कंपनियों ने लिए लिखा डीसी को
नगर निगम कमिश्नर ने दो और कंपनियों पर कार्रवाई करने के लिए डीसी को पत्र लिखा है जिसमे सुपर पब्लिसिटी औीर आकृति इंटरप्राइज का नाम शामिल है। नगर निगम के अनुसार सुपर पब्लिसिटी से 42 लाख और आकृति कंपनी से 12 लाख रुपये की रिकवरी करनी है।
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