कोरोना महामारी से पहले जब वह ड्यूटी से घर जाती थी तो बच्चे दौड़कर गले लग जाते थे। लेकिन कोरोना काल में यह सभी चीजें खत्म हो गई हैं। पहले अक्तूबर 2020 में कोरोना पॉजिटिव हुई तो उस समय करीब एक महीना बच्चों से दूर रही और वह समय मेरे लिए सबसे ज्यादा कठिन था। पति ने बच्चों को संभाला।
सीमा ने बताया कि कोरोना वैक्सीन की दोनों दो डोज ले रखी हैं। लेकिन अभी भी मैं और पति दोनों कोरोना संक्रमित हैं। हम दोनों बच्चों से अलग दूसरे कमरे में रहते हैं। हमारे पड़ोस में हमारे रिश्तेदार हैं जो बच्चों के लिए खाना-पीना देकर जाते हैं। इस संकट के दौर में हमें एक दूसरे से ही प्रेरणा मिलती है और कोरोना से जंग जारी है। कोरोना पर जीत जरूर हासिल करेंगे।
आठ माह के बच्चे से दूर रहकर संक्रमितों की देखरेख कर निभाई कोरोना से जंग में ड्यूटी
अगर बॉर्डर पर जंग छिड़ी हो तो फौजी को जाकर मोर्चा संभालना ही पड़ता है। कोरोना महामारी के दौरान डॉ. जैसमीन की हालत भी बिल्कुल एक फौजी जैसी ही थी। जब उनका बेटा महीप मात्र आठ महीने का था, उसी दौरान एक डॉक्टर होने के नाते उनकी कोरोना महामारी से लोगों को बचाने की जिम्मेदारी भी बढ़ी गई थी। ऐसे में उनके परिवार में पति सरदार गुरालम सिंह, ससुर और ननद की मदद से ड्यूटी पर जाकर उन्होंने कोरोना संक्रमितों का इलाज करने के लिए मोर्चा संभाला।
कई पल ऐसे भी आए कि वह अपने छोटे बच्चे को गले लगाए बिना ही ड्यूटी पर गई। अब सपना एक ही है कि इस महामारी से देश को जल्द निजात मिले। डॉ. जैसमीन कौर ने लोगों से अपील की है कि वह कोरोना गाइडलाइन का पालन करें, ताकि हमारी मेहनत कामयाब हो पाए। मेरी जिंदगी में लोगों की सेवा करना और मातृत्व धर्म निभाना दोनों ही जरूरी था। बेटे महीप के बचपन के साथ मुझे यह कोरोना काल भी हमेशा याद रहेगा।