पंजाब में हुए बीज घोटाले में शामिल अफसरों और कर्मियों पर छह माह के अंदर कार्रवाई करने का आदेश हाईकोर्ट ने दिया है। सरकार की ओर से घोटाले में शामिल सरकारी अमले को पहले ही चार्जशीट किया जा चुका है। वहीं इस मामले में चार कंपनियों के लाइसेंस रद्द किए गए हैं।
केंद्र सरकार की स्कीमों के तहत पंजाब को भी बीज पर सब्सिडी मिली थी, लेकिन यह सब्सिडी किसानों तक नहीं पहुंच सकी। यह मसला पंजाब कांग्रेस के सीनियर नेता सुनील जाखड़ ने विधानसभा में भी उठाया था। विधानसभा ने कमेटी गठित की थी। इससे पहले कार्रवाई होती, कमेटी भंग कर दी गई।
एक व्यक्ति ने एडवोकेट सुरिंदरपाल टिन्ना के माध्यम से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर घोटाले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। आरोप था कि बीज कंपनियों और अफसरों की मिलीभगत के कारण किसानों तक सब्सिडी नहीं पहुंच पाती है।
हाईकोर्ट ने याचिका पर सरकार को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में अवमानना याचिका दायर की गई। सरकार ने अपना पक्ष रखा कि बीज में सब्सिडी को लेकर हुए घोटाले के मामले में बीज देने वाली दोषी चार कंपनियों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं।
वहीं दोषी अफसरों को पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और अब उन्हें चार्जशीट भी किया जा चुका है। जस्टिस महेश ग्रोवर ने सरकार की जानकारी पर याचिका का निपटारा करते हुए सरकार को दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ छह महीनों में कार्यवाई पूरी करने के आदेश दिए हैं।