अब नहीं कोई बात खतरे की, अब सभी को सभी से खतरा है...जॉन एलिया का यह शेर शनिवार को जिला अदालत में हुए गोली कांड के बाद एकदम सटीक बैठता है। दो दिन पहले हुई वारदात के बाद कोर्ट परिसर में जरूर सुरक्षा बढ़ा दी गई हो। इसके बावजूद असुरक्षा जैसी स्थिति बनी हुई है।
शनिवार को सर्विस ब्लॉक के दूसरे मंजिल पर स्थित फैमली कोर्ट में पंजाब पुलिस के रिटायर्ड एआईजी मालविंदर सिंह सिद्धू ने अपने कृषि मंत्रालय में आईसीएएस के रूप में तैनात दामाद हरप्रीत सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी। रविवार को कोर्ट बंद रहा। सोमवार को कोर्ट खुलने के साथ पूरे परिसर में सुरक्षा के इंतजाम बढ़ा दिए गए हैं।
पुलिस कोर्ट कांप्लेक्स के हर फ्लोर पर आने-जाने वाले लोगों की स्कैनर के साथ हाथ से चैकिंग करते नजर आए। इसके साथ लोगों की सामना की चेकिंग भी जा रही थी। वारदात के बाद भले ही कोर्ट परिसर में चेकिंग बढ़ा दी गई हो। इसके बावजूद असुरक्षा की स्थिति बनी हुई। पूरे कोर्ट में सात गेट है पर सुरक्षा के दृष्टिकोण से देखा जाए तो मात्र दो गेट पर ही ठीक से सुरक्षा मौजूद है। ऐसे में फिर कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
एसएसपी ने कोर्ट में सुरक्षा का लिया जायजा
एसएसपी कंवरदीप कौर सोमवार को कोर्ट परिसर में सुरक्षा का जायजा लेने के लिए पहुंची थी। इस दौरान उन्होंने आने-जाने वाले लोगों चेकिंग करने के आदेश दिए। इसके साथ बार एसोसिएशन को पीछे खुले पड़े गेट को बंद करने को लेकर विचार करने को कहा। वहीं, बार एसोसिएशन के सदस्यों ने एसएसपी से सुरक्षा बढा़ने को लेकर मांग की गई है।
वकील नहीं करवा रहे खुद की चेकिंग
कोर्ट परिसर में चेकिंग कर रहे पुलिस कर्मियों ने बताया कि काम के सिलसिले में आ रहे लोग तो आसानी से चेकिंग करवा रहे। पर वकील अपनी चेकिंग नहीं करवा रहे। चेकिंग करवाने का कहने पर वकील तर्क देते हैं कि हम कोई अपराधी थोड़ी है, कोर्ट हमारा घर है। घर में थोड़े न चेकिंग की जरूरत पड़ती है।
कोर्ट परिसर में मात्र 40 सीसीटीवी कैमरे
जिला अदालत को परिसर काफी बड़े क्षेत्रफल में फैला हुआ। परिसर में तीन ब्लॉक बने हुए है, जिसमें सर्विस ब्लॉक, कोर्ट कांप्लेक्स और चैंबर सर्विस ब्लॉक शामिल है। मिली जानकारी के मुताबिक इतने बड़े परिसर में मात्र 40 से 45 कैमरे लगे हुए है। शनिवार को सर्विस ब्लॉक में जहां वारदात हुई थी, वह सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हुए हैं।
जिला कोर्ट में कई गेट
जिला अदालत में कुल सात गेट लगे हुए है। इसमें मैन गेट, बैक गेट, चैंबर कांप्लेक्स, कोर्ट कांप्लेक्स की ओर से कोर्ट में जाने वाले गेट शामिल है।
गेट नंबर 1
गेट नंबर एक से लोग अपने वाहन व पैदल कोर्ट परिसर में एंट्री कर रहे है। एंट्री गेट पर किसी भी वाहन या पैदल आने वाले आदमी की जांच नहीं की जाती है। जहां एकमात्र कैमरा लगा हुआ है।
गेट नंबर 2
इस गेट का प्रयोग लोग कोर्ट परिसर से बाहर जाने के लिए करते है। इस गेट पर एक दो पुलिस वाले जरूर बैठे रहते है। पर सुरक्षा की दृष्टिकोण से प्रबंध भी नहीं है। वहीं, इस गेट पर कैमरा भी नहीं है।
गेट नंबर 3
इस गेट का प्रयोग लोग कोर्ट कांप्लेक्स में जाने के लिए करते है। यह कोर्ट परिसर का एकमात्र ऐसा गेट है, जहां, मेटल डिटेक्टर व स्कैनर दोनों मौजूद है। इसके साथ घटना के बाद पुलिस लोगों की हाथ से भी चेकिंग कर रही है।
गेट नंबर 4
इस गेट का प्रयोग लोग पार्किंग की ओर से चैंबर कांप्लेक्स में जाने के लिए करते है। इस गेट पर दो पुलिसकर्मी के साथ एक मेटल डिटेक्टर लगा हुआ है। पुलिस यहां घटना के बाद वकीलों की भी चेकिंग कर रही है।
गेट नंबर 5
इस गेट का प्रयोग लोग चैंबर कांप्लेक्स में आगे की तरफ से जाने के लिए करते है। इस कांप्लेक्स के मुख्य द्वार पर सुरक्षा के नजरिए से कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है। यहां कोई पुलिसकर्मी भी मौजूद नहीं रहता है।
गेट नंबर 6
यह गेट कई सालों से बंद पड़ा हुआ है। गेट के बाहर की तरफ जंगल झाड़ियां उग आई है। यह कोई कैमरा या पुलिसकर्मी मौजूद नहीं होता है। ऐसे में आरोपी यह से कोर्ट में घुस सकता है।
गेट नंबर 7
यह गेट सबसे खतरनाक गेट है। वैसे तो यह कोई औपचारिक गेट नहीं है। पीछे की दीवार से तोड़कर वकीलों के लिए यह रास्ता बनाया गया है। पर लोग साइकिल ट्रैक पर अपनी गाड़ियां लगाकर कोर्ट में जाने के लिए इस रास्ते का प्रयोग कर रहे है।
गेट नंबर 8
यह गेट कोर्ट परिसर के बगल में बन रही मल्टीलेवल पार्किंग की ओर बना हुआ है। पार्किंग का काम चलने के चलते फिलहाल इस गेट पर ताला लगा रखा है।