चंडीगढ़। जेल के अंदर आने वाले वाहनों में अब किसी भी वस्तु को छिपा कर नहीं लाया जा सकेगा। बुड़ैल जेल में मई महीने में अंडर व्हीकल सिक्योरिटी सिस्टम (यूवीएसएस) काम करना शुरू कर देगा। इसके बाद यहां आने-जाने वाले हर वाहन की जांच की जाएगी। जेल प्रबंधन की ओर से इसका टेंडर अलॉट किया जा चुका है। देश में कुछ ही जेलों में अंडर व्हीकल सिक्योरिटी सिस्टम मौजूद है। इसमें एक कैमरा और ऑटोमेटिक रजिस्ट्रेशन रिकॉर्डिंग सिस्टम होता है। गुजरने वाले हर कंपनी के वाहनों का पूरा ब्यौरा इस सिस्टम के पास होता है। इस सिस्टम के लगने के बाद 30 किलोमीटर प्रति घंटा गति तक वाले किसी भी वाहन के नीचे छिपी किसी भी वस्तु को इस आधुनिक सिस्टम से देखा और जांचा जा सकेगा। जेल के भीतर के पूरे इलाके को सीसीटीवी कैमरा से कवर करने के बाद जेल की दीवार के इर्द-गिर्द भी 46 नए हाई रेजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। जिनकी निगरानी के लिए एक अलग से वीडियो वॉल कंट्रोल रूम बनाया गया है। इस कंट्रोल रूम में जेल प्रशासन के अधिकारी व कर्मचारी 24 घंटे वीडियो कॉल पर जेल के अंदर बाहर होने वाली हर हरकत पर पैनी नजर बनाए रखते हैं। आपको बता दें बब्बर खालसा आतंकी संगठन से जुड़े कई खतरनाक आतंकवादी यहां पर कैद हैं। बुडैल जेल ब्रेक चंडीगढ़ की अत्याधुनिक मॉडल बुड़ैल जेल के पास टिफिन बम और आरडीएक्स मिलने के बाद आईजी (जेल) दीपक पुरोहित ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई बैठकें की थीं, जिसके बाद इन उपायों पर विचार किया गया और इन्हें लागू किया जा रहा है।
खराब माहौल से दहशत बढ़ी
पंजाब में अब तक कई आतंकी घटनाएं हो चुकी हैं। कोर्ट परिसर तक में ब्लास्ट हो चुका है। गैंगवार भी बढ़ी हैं। चंडीगढ़ बुड़ैल जेल की दीवार के पास आरडीएक्स मिल चुका है। मोहाली में इंटेलिजेंस हेडक्वार्टर की बिल्डिंग पर आरपीजी अटैक हो चुका है। पंजाब की कुछ जेलों पर संभावित आतंकी हमले की रिपोर्ट से खतरा और भी बढ़ गया है। नवंबर 2016 में नाभा जेल भी ब्रेक हो चुकी है। इस सब को देखते हुए चंडीगढ़ ने सुरक्षा बढ़ाने का फैसला किया है।
2004 में जेल ब्रेक हुआ था
बुड़ैल जेल में जनवरी 2004 में जेल ब्रेक हो चुका है। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या में दोषी खालिस्तानी आतंकी जगतार सिंह हवारा, जगतार सिंह तारा और परमजीत सिंह भ्यौरा एक हत्याकांड में दोषी देवी सिंह के साथ 94 फुट लंबी सुरंग बना फरार हो गए थे। देवी सिंह को छोड़ बाकी तीनों आतंकी पकड़े गए थे। हाल ही में कई हत्याओं में आरोपी बैरक नंबर 12 में बंद मंजीत सिंह नामक कैदी से मोबाइल फोन बरामद हुआ था। उसमें सिम कार्ड भी था। जेल प्रशासन ने इस घटना के बाद से कैदियों की जांच बढ़ा रखी है।