चंडीगढ़। स्वास्थ्य विभाग ने जीएमएसएच-16 समेत तीन अस्पतालों में दवा की दुकान खोलने का निर्णय लिया है। जनता इस निर्णय का स्वागत कर रही है लेकिन सवाल यह भी उठने लगे हैं कि आखिर सेक्टर-48 का 100 बेड का अस्पताल प्रशासन की ओर से उपेक्षित क्यों है। जिस अस्पताल में गंभीर मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है वे दवा से लेकर चाय-पानी तक के लिए तरस रहे हैं। इतना ही नहीं वहां न तो जांच की व्यवस्था है न इमरजेंसी केयर। भर्ती मरीजों को जांच से इलाज तक के लिए एंबुलेंस में भरकर जीएमसीएच-32 भेजा जा रहा है।
स्थिति यह है कि सेक्टर 48 के अस्पताल में सिर्फ मरीजों को भर्ती होने के लिए बेड उपलब्ध कराया जा रहा है। उसके बाद मरीज भगवान भरोसे छोड़ दिए जा रहे हैं। क्योंकि वहां न तो दवा की व्यवस्था है न ही मरीज व उनके परिजनों के लिए खाने की। परिसर में एक भी मेडिकल शॉप या कैंटीन नहीं है। मरीजों के लिए दूध, गर्म पानी के लिए परिजनों को आधी रात यहां-वहां भटकना पड़ रहा है। अस्पताल से बाजार आधा किलोमीटर दूर है और वह भी रात 10 बजे बंद हो जाता है।
मौत के बाद सत्यापन के लिए भेजा जाता है जीएमसीएच-32
सेक्टर-48 में भर्ती गंभीर मरीज की मौत हो जाने पर सत्यापन के लिए ईसीजी कराने जीएमसीएच-32 ले जाना पड़ता है। उसके बावजूद अस्पताल प्रशासन जांच की व्यवस्था को लेकर अनदेखी कर रहा है। जीएमसीएच-32 के जिन मरीजों को सेक्टर-48 भेजने को कहा जा रहा है वे अव्यवस्था के डर से वहां जाने से इन्कार कर दे रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि रेडियोथेरैपी के मरीजों को कॉर्डियक अरेस्ट का खतरा होता है लेकिन उन्हें दर्द होने पर ईसीजी के लिए जीएमसीएच 32 भेजा जाता है या फिर वहां से विशेषज्ञ 48 में बुलाया जाता है।
भटक गए उद्देश्य से
सेक्टर-48 में हॉस्पिटल को बनाने के पीछे मुख्य उद्देश्य 45, 46, 47, 49, 50, 51 जगतपुरा, फैदां, रामदरबार और मोहाली की जनता को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराना था लेकिन सुविधा शुरू होने के बाद भी इस क्षेत्र की जनता के हाथ निराशा ही लगी है। अब भी चंडीगढ़ के उस क्षेत्र की बड़ी आबादी को इलाज कराने के लिए अपने घर से कई किमी दूर जाना पड़ रहा है।
हर स्तर पर कमी ही कमी
सेक्टर-48 के अस्पताल को संचालित करने के लिए 74 डॉक्टर, 161 पैरा मेडिकल स्टाफ, 10 प्रशासनिक स्टाफ, एक ज्वाइंट कंट्रोलर, एक डिप्टी कंट्रोलर और एक सेक्शन अफसर की नियुक्ति की जानी थी लेकिन अब तक तैनाती की प्रक्रिया लंबित है। ऐसे में जीएमसीएच-32 अस्पताल प्रशासन को अपने ही डॉक्टर और स्टाफ वहां तैनात करने पड़ रहे हैं, जिससे वहां की भी व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
सेक्टर 48 अस्पताल की भी सुध ले प्रशासन
आखिर जिस अस्पताल को करोड़ों खर्च कर बड़ी उम्मीदों के साथ बनाया गया हो उसे ऐसे दरकिनार कैसे किया जा सकता है। सेक्टर 48 का अस्पताल राजनीति का शिकार हो गया है इसलिए सबकुछ होने के बावजूद वहां मरीजों के हित में व्यवस्था नहीं हो पा रहा है।
गौरव कुमार, सेक्टर 45
चौंकाने वाली बात यह है कि मरीजों के हित में बेहतर सुविधा देने का दावा करने वाले प्रशासनिक अधिकारी भी इस पर मौन साधे हुए हैं। चाय-पानी और दवा को छोड़िए आखिर कैंसर जैसे मर्ज से जूझ रहे मरीज को ऐसी जगह कैसे भर्ती किया जा सकता है, जहां इलाज के नाम पर व्यवस्था शून्य हो। मामले पर गंभीर होने की जरूरत है।
कृष्ण कुमार, मलोया
कोट-
पहले चरण में तीनों सिविल अस्पतालों व जीएमएसएच-16 में दवा की दुकान खोलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जहां तक 48 अस्पताल की बात है तो उसे लेकर भी योजना बनाई जा रही है। जल्द ही उचित निर्णय लिया जाएगा।
-यशपाल गर्ग, स्वास्थ्य सचिव