आरक्षण के लिए चल रहे जाट आंदोलन के ताजा हालात पर उच्च अधिकारियों को भेजी गई सीआईडी की गोपनीय रिपोर्ट लीक हो गई है। रविवार 12 फरवरी को सीआईडी के पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय के प्रवर पुलिस अधीक्षक की ओर से भेजी रिपोर्ट के लीक होने से हड़कंप मच गया है।
पुलिस महानिदेशक के साथ ही सभी उच्च पुलिस अधिकारियों और मेवात-पंचकूला के अलावा बीस जिलों के डीसी-एसपी को भेजी रिपोर्ट सार्वजनिक होने पर सकरार ने जांच बिठा दी है। खुफिया रिपोर्ट में आंदोलन से जुड़े अहम पहलु शामिल हैं।
इसमें बताया गया है कि सरकार की पांच सदस्यीय समिति से पानीपत में हुई वार्ता के बाद आंदोलनकारियों का मनोबल बढ़ा है। धरना स्थलों पर जाट समुदाय की संख्या लगातार बढ़ रही है।
रिपोर्ट में धरना स्थलों पर मौजूद लोगों की संख्या बताने के साथ ही आंदोलन की कमान असामाजिक तत्वों के हाथ आने का भी अंदेशा जताया गया है। साथ ही धरनों पर 19 फरवरी को शहीदी दिवस मनाने के लिए अधिक से अधिक भीड़ जुटाने पर सचेत रहने के निर्देश दिए गए हैं।
आंदोलनकारी धरनों को लंबा खींचने की फिराक में हैं
तीसरे दिन भी धरने पर डटे रहे जाट
- फोटो : अमर उजाला
सीआईडी ने संभावना जताई कि पानीपत की वार्ता के बाद आंदोलनकारी धरनों को लंबा खींचने की फिराक में हैं। इसलिए कानून-व्यवस्था की दृष्टि से इनका जल्दी खत्म होना जरूरी है। चूंकि, धरनों पर महिलाओं और बच्चों के साथ युवाओं की खासा तादात जुट रही है। रविवार को जसिया में हाईवे जाम होने से स्थिति बिगड़ गई थी।
युवाओं के पास असला और डंडे-लाठियां होने से आंदोलन के किसी भी समय उग्र होने से इनकार नहीं किया जा सकता। रिपोर्ट में चेताया गया है कि 13 फरवरी तक धरने खत्म न होने पर एक राजनीतिक दल से जुड़े युवा नेता ने शिक्षण संस्थान भी बंद कराने की चेतावनी दी है। इसलिए जल्दी समाधान निकालने के लिए उचित कदम उठाए जाएं।
जाट नेता दूसरे दौर की वार्ता से पहले सरकार पर और दबाव बढ़ाने की भी तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए पश्चिमी उत्तरप्रदेश और पंजाब के जाटों को भी धरनों में शामिल करने की तैयारी चल रही है। उधर, सरकार इस बात से हैरान है कि रिपोर्ट लीक कैसे हुई। ऐसे में कानून-व्यवस्था से जुड़ा कोई भी दस्तावेज बाहर आने से इंकार नहीं किया जा सकता। सरकार ने जल्दी रिपोर्ट लीक होने की पड़ताल कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।