चंडीगढ़ के जीएमएसएच-16 में चिह्नित मेडिकल की दो दुकानों में से एक (शॉप नंबर-4) गुरुवार को आवंटित कर दी गई। इस दुकान का आवंटन 17.01 लाख प्रतिमाह के किराए पर किया गया है। वहीं चिह्नित की गई दूसरी दुकान और सेक्टर-45 के अस्पताल में मेडिकल की एक दुकान के आवंटन के लिए बोली आमंत्रित की गई है। इन दोनों दुकानों के लिए बोली लगाने की अंतिम तिथि 17 नवंबर तय की गई है। यह जानकारी स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग ने दी है।
उन्होंने बताया कि जीएमएसएच-16 में पिछले 29 वर्षों से संचालित एकमात्र दवा की दुकान का किराया महज 2.5 लाख रुपये प्रतिमाह है जबकि उसकी जगह शॉप नंबर-4 से दोगुनी है। ऐसे में संबंधित दुकान संचालक के लीज को समाप्त करने के लिए एक महीने का नोटिस दिया गया है। लीज समाप्त कर नए सिरे से दुकान का आवंटन किया जाएगा। इसकी प्रक्रिया निष्पक्ष और मानक के अनुरूप होगी।
स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि पुरानी दुकान के मासिक किराए की तुलना अगर मौजूदा स्थिति के साथ किया जाए तो उससे लगभग 30 लाख रुपये प्रतिमाह किराया मिलेगा। ऐसे में प्रशासन को प्रतिमाह 27 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है। वहीं, अगर इसकी विस्तृत रिपोर्ट देखी जाए तो एक साल में लगभग पांच करोड़ से अधिक का नुकसान हो सकता है।
स्वास्थ्य विभाग के टेंडर की प्रगति रिपोर्ट
- जीएमएसएच-16 की कैंटीन के लिए 9.21 लाख प्रतिमाह प्राप्त हुए हैं। पिछला मासिक किराया लगभग 5 लाख प्रति माह था।
- मनीमाजरा के सिविल अस्पताल में नई केमिस्ट शॉप के लिए सबसे ऊंची बोली प्रति माह 10.26 लाख रुपये आई है।
- सेक्टर-22 स्थित सिविल अस्पताल के नए केमिस्ट शॉप के लिए सबसे अधिक बोली 6.25 लाख प्रति माह आई है।
- जीएमएसएच-16 में कैंटीन के पास अतिरिक्त केमिस्ट शॉप के लिए बोली चल रही है और बोली जमा करने की अंतिम तिथि 19.10.2022 है।
मरीजों की जेब पर पड़ेगा असर
जीएमएसएच-16 में 17 लाख से ज्यादा मासिक किराए पर मेडिकल दुकान के आवंटन से एक तरफ जहां सरकार को आर्थिक फायदा होगा, वहीं इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ेगा। लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में कम से कम किराए पर दुकान अलॉट की जानी चाहिए ताकि मरीजों को सस्ती दर पर दवाइयां उपलब्ध हो सकें।