एडवाइजर विजय देव ने एस्टेट संबंधी लंबित मामलों को जल्द निपटाने के लिए तीनों एसडीएम को अपने एरिया के केस सुनने की पावर दी। लेकिन उनका यह फैसला ज्यादा कारगर सिद्ध नहीं हुआ। पिछला पूरा साल लोगों का कोर्ट में तारीख पर तारीख भुगतने में बीत गया। महज 10 प्रतिशत मामले ही वर्ष 2015 में निपट पाए।
वर्ष 2015 में शहर के तीनों एसडीएम की कोर्ट में बिल्डिंग मिसयूज, वॉयलेशन और प्रापर्टी विवाद के कुल 2986 मामले सुनवाई के लिए आए। जिनमें से केवल 58 मामले ही निपट पाए। एसडीएम कोर्ट सप्ताह में दो या तीन दिन ही लगती है। इस कारण मामलों की संख्या निरंतर बढ़ रही है।
एरिया वाइज एसडीएम कोर्ट की स्थिति
एसडीएम सेंट्रल: एसडीएम सेंट्रल प्रिंस धवन के पास बिल्डिंग वॉयलेशन से संबंधित कुल 849 मामले और मिसयूज के 132 मामले सुनवाई के लिए आए। इनमें से बिल्डिंग वॉयलेशन के 12 और मिसयूज के 4 मामले सुलझाए गए।
एसडीएम साउथ: एसडीएम साउथ कृति गर्ग के पास बिल्डिंग वॉयलेशन को लेकर 528 और मिसयूज को लेकर 104 मामले सुनवाई के लिए आए। इसमें से एसडीएम कोर्ट में बिल्डिंग वॉयलेशन के 8 और मिसयूज के 2 मामले सुलझाए गए।
एसडीएम ईस्ट: एसडीएम ईस्ट तपस्या राघव के पास बिल्डिंग वॉयलेशन के 857 मामले और मिसयूज के 255 मामले सुनवाई के लिए आए। इनमें से बिल्डिंग वॉयलेशन के 4 और मिसयूज के 24 मामले सुलझाए गए। लोगों की दिक्कतें जानने के लिए तपस्या राघव भी अब पब्लिक कैंप लगा रही हैं। हालांकि एसडीएम कृति गर्ग और तपस्या राघव ने साल के अंत में यूटी प्रशासन ज्वाइन किया। इससे पहले एसडीएम साउथ कशिश मित्तल थे और एसडीएम ईस्ट दानिश अशरफ थे।
अजीत बालाजी जोशी, डीसी, चंडीगढ़ ने बताया कि एसडीएम को सुनवाई के बाद तेजी से मामले निपटाने के लिए आदेश दिए गए हैं। लोगों की पहुंच आसानी से अधिकारियों तक हो, इसके लिए पब्लिक कैंप भी लगाए जा रहे हैं। अधिकारियों को पुराने मामलों के लिए एक डेडलाइन तय करने को कहा गया है।