चंडीगढ़। जीएमएसएच- 16 स्थित जन औषधि केंद्र पर शुक्रवार को ड्रग इंस्पेक्टर ने आठ ब्रांडेड दवाइयां जब्त कीं। वहीं उन्होंने दवाओं की बिक्री संबंधित बिल और अन्य साक्ष्य भी रिकॉर्ड के तौर पर लिए। मामले पर स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग का कहना है कि जन औषधि केंद्र पर ब्रांडेड दवाइयां बेचे जाना प्रथम दृष्टया तो गलत है, लेकिन इस पर स्टोर संचालक ने जानकारी दी है कि वे मानक के अनुसार जेनेरिक दवाओं की उपलब्धता न होने पर वह ब्रांडेड दवाओं का स्टॉक रख रहा था।
उन्होंने बताया कि विभाग ने जांच शुरू कर दी है। ड्रग इंस्पेक्टर के साक्ष्यों के आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके साथ ही इस संबंध में प्रधानमंत्री जन औषधि परियोजना संबंधित मानकों के आधार पर तय किया जाएगा कि उसका यह कहना सही है या गलत। यशपाल गर्ग ने कहा कि प्रथम दृष्टया जन औषधि केंद्र पर ब्रांडेड दवाओं की बिक्री फार्मास्यूटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेज ब्यूरो ऑफ़ इंडिया के समझौते का उल्लंघन माना जाएगा, लेकिन इस पर प्रधानमंत्री जन औषधि परियोजना के मानको पर भी गौर करना जरूरी है। ऐसे में मामले की व्यापक जांच कर मानकों के आधार पर यह तय किया जाएगा कि जेनेरिक दवाओं के साथ ब्रांडेड दवाएं रखकर उन मानकों का उल्लंघन किया गया है कि नहीं। उसके आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बता दें कि जीएमएसएच-16 स्थित जन औषधि केंद्र पर वीरवार को एक मरीज को जेनेरिक दवाओं की जगह ब्रांडेड दवाएं बेची गई थी। इसके बाद उसने अस्पताल प्रशासन से इसकी शिकायत की थी। शिकायत का संज्ञान लेकर विभाग ने जांच शुरू कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि ब्रांडेड दवाओं को बेचने के लिए अस्पताल परिसर में 17 लाख रुपये के मासिक किराए पर दुकान अलॉट की जा रही है। वहीं जन औषधि के नाम पर महज 80 हजार किराया देकर खुलेआम ब्रांडेड दवाएं बेची जा रही हैं, जो पूरी तरह गलत है।