चंडीगढ़। आधुनिक जीवनशैली जैसे बढ़ता स्क्रीन टाइम और आउटडोर टाइम में कमी तेजी से मायोपिया के मामलों को बढ़ा रही है। विशेषज्ञों ने पीजीआई के एडवांस्ड आई सेंटर में नेशनल मायोपिया अवेयरनेस वीक (14–21 नवंबर) के तहत शुक्रवार को बच्चों और अभिभावकों को बढ़ते मायोपिया के खतरे से अवगत कराया।
कार्यक्रम की शुरुआत आउट पेशेंट पेडियाट्रिक क्लिनिक में रंग भरने की गतिविधि के साथ हुई। इसमें छोटे बच्चों ने उत्साह से भाग लिया। पूरे सप्ताह पैम्पलेट वितरित कर मायोपिया के कारण, लक्षण और बचाव के तरीकों की जानकारी दी गई। पेडियाट्रिक ऑप्थल्मोलॉजी डिविजन की प्रो. जसप्रीत सुखीजा ने बताया कि हर माह 50–60 नए मायोपिया मरीज सामने आ रहे हैं और इनमें करीब 43% बच्चे हाई मायोपिया से ग्रसित हैं।
जानिए... क्या है मायोपिया
मायोपिया को निकट दृष्टिदोष भी कहते हैं। एक ऐसी नेत्र-स्थिति है जिसमें व्यक्ति को पास की वस्तुएं तो साफ दिखाई देती हैं लेकिन दूर की वस्तुएं धुंधली दिखती हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि प्रकाश रेटिना पर केंद्रित होने के बजाय उसके सामने केंद्रित हो जाता है। यह आंख के असामान्य आकार (आमतौर पर बहुत लंबी) या कॉर्निया के अत्यधिक वक्रता के कारण होता है।
बच्चों में मायोपिया रोकने के तरीके
-स्क्रीन का ज्यादा उपयोग करने से रोकें और उन्हें हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखने के लिए कहें
-बच्चों को हर दिन कम से कम 2 घंटे बाहर खेलने और प्राकृतिक रोशनी में समय बिताने के लिए प्रोत्साहित करें
-किताबें या स्क्रीन आंखों से लगभग 30-40 सेमी दूर रखने को कहें
-जब बच्चे पढ़ रहे हों या कोई और काम कर रहे हों तो कमरे में पर्याप्त रोशनी हो
स्वास्थ्य और देखभाल
-बच्चों की नियमित आंखों की जांच करवाएं ताकि किसी भी समस्या का जल्दी पता चल सके
-बच्चों को विटामिन-ए से भरपूर सब्जियां, अंडे और मेवे जैसे पोषक तत्वों वाला संतुलित आहार खिलाएं
-आंखों के तनाव को कम करने के लिए आंखों की एक्सरसाइज सिखाएं