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चैस्कॉन 2014: दिग्गजों ने किया मोटापे पर मंथन

Fri, 28 Feb 2014 02:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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दुनिया में चीन बेशक सबसे तेजी से तरक्की कर रहा है, लेकिन मोटापे जैसी बीमारी में भी चीन का पहला स्थान है। 92.4 करोड़ लोग मोटापे से ग्रस्त हैं। भारत भी इस मामले में ज्यादा पीछे नहीं है।
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भारत के 62.4 करोड़ लोग मोटापे से ग्रस्त हैं और इसका ग्राफ तेजी से बढ़ता जा रहा है। मोटापा एक साइलेंट किलर बताया। यह जानकारी वीरवार को पंजाब यूनिवर्सिटी में पीजीआई के प्रो. अनिल भंसाली ने दी। वह पीयू में चंडीगढ़ साइंस कांग्रेस (चैसकॉन-14) के तहत लेक्चर देने के लिए पहुंचे थे।

प्रो. भंसाली ने बताया कि 2035 तक दुनिया में 592 करोड़ लोग मोटापे के शिकार होंगे। इसकी बड़ी वजह उन्होंने बदलते खानपान को बताया। मोटापे से होने वाली मौत का ग्राफ भी बढ़ रहा है। मौत का कारण किडनी खराब होना, रेटिना, नर्व सिस्टम और ब्लड शुगर जैसी वजह हैं।
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प्रो. भंसाली ने बताया कि देश में मोटापे के उपचार के लिए लोग जमकर खर्च करते हैं। भारत में 71 फीसदी कर्मचारी और 82 फीसदी किसी भी कंपनी के सीईओ मोटापे की बीमारी से ग्रस्त हैं। उन्होंने कहा कि सादा और पौष्टिक खाना और रेगुलर व्यायाम से ही आदमी स्वस्थ रह सकता है।

चैसकॉन के दूसरे इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी नई दिल्ली (2010-13) तक प्रेसिडेंट रहे डॉ. कृष्ण लाला, आईआईटी दिल्ली से चारुसीता चक्रवर्ती जैसे साइंटिस्ट भी कार्यक्रम में पहुंचे।

इस मौके पर पीयू कुलपति प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर ने कहा कि चैसकॉन का मकसद कालेज और यूनिवर्सिटी स्तर पर युवाओं को जाने माने साइंटिस्ट से रूबरू करवाकर उन्हें सही दिशा दिखाना है।

चैसकॉन में यूनिवर्सिटी ऑफ बर्किमघन (यूके) के वाइस प्रिंसिपल प्रो. एडम टिकल भी पहुंचे। उन्होंने पीयू के साथ रिसर्च प्रोग्राम करने का भी आश्वासन दिया।

तरक्की मॉडल को बदलना होगा: प्रो. लाल
बढ़ती प्रतिस्पर्धा में भारत को अन्य देशों से आगे बढ़ने के लिए तरक्की के मॉडल को नए सिरे से तैयार करना होगा। यह विचारपीयू चैसकॉन में इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी नई दिल्ली के पूर्व प्रेसिडेंट रहे प्रो. कृष्ण लाल ने कही। उन्होंने बताया कि अंग्रेजों ने एसटीपीपी मॉडल को अपनाया था।

इसमें साइंस टेक्नोलॉजी प्रोडेक्टिविटी और प्रॉसपेरिटी शामिल थे। लेकिन, चीन ने साइंस और टेक्नोलॉजी के पीपी मॉडल को अपनाया। भारत भी टेक्नोलॉजी के मामले में साबित कर सकता है, लेकिन इसके लिए नई सोच की जरूरत है।
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उधर, आईआईटी दिल्ली की प्रो. चारुसीता चक्रवर्ती ने पानी की उपयोगिता और भविष्य में पानी की दिक्कतों को लेकर शोधपत्र पेश किया। 
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