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8 सीटर वैन में बिठा रखे थे 40 बच्चे, 20 पहुंचे अस्पताल, एक गंभीर

Thu, 15 Sep 2016 02:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, साढौरा(यमुनानगर)
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accident - फोटो : Demo Pic
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यमुनानगर के साढौरा कस्बे के जनता हाई स्कूल की टाटा मैजिक वैन के पलट जाने से उसमें सवार स्कूल के 20 बच्चे घायल हो गए। दस बच्चों की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें यमुनानगर व जगाधरी अस्पताल रेफर कर दिया गया। यहां एक बच्चे की हालत गंभीर होने पर उसे पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया। वैन चला रहे स्कूल संचालक एवं प्रिंसिपल बलजीत सिंह को भी चोट लगी हैं। 
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कस्बे के जनता हाई स्कूल की वैन को स्कूल के संचालक एवं प्रिंसीपल बलजीत सिंह चला रहे थे। वैन घाड़ क्षेत्र के गांवों के बच्चों को बिठा कर साढौरा की तरफ आ रही थी। गांव रतौली के समीप वैन अचानक अनियंत्रित हो गई तथा सड़क से नीचे उतर कर पेड़ से टकरा कर पलट गई। वैन पलटते ही बच्चों ने चीखना चिल्लाना शुरू कर दिया। बच्चों की चीख पुकार सुन कर सड़क से गुजर रहे मिर्जापुर वासी गुलाब सिंह एवं सलेमपुर निवासी शौकत ने अन्य राहगीरों की मदद से बच्चों को वैन से बाहर निकालना शुरू कर दिया। 
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प्रिंसिपल का नहीं मिला लाइसेंस, केस दर्ज

Accident - फोटो : Demo Pic
वैन से क्षमता से अधिक बच्चे भरे हुए थे, जिसके कारण बच्चे एक दूसरे के नीचे बुरी तरह से दबे हुए थे। लोगों ने एक-एक करके बच्चों सहित प्रिंसिपल बलजीत सिंह को बाहर निकाला। शौकत ने अपने टैंपो की मदद से बच्चों एवं प्रिंसिपल को स्थानीय सामुदायिक चिकित्सा केंद्र में पहुंचाया। यहां 10 बच्चों की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें ट्रामा सेंटर व जगाधरी सिविल अस्पताल रेफर कर दिया गया। शेष बच्चों एवं प्रिंसिपल को प्राथमिक चिकित्सा दी गई। ट्रामा सेंटर में कंडईवाला गांव के अनीस की हालत गंभीर होने पर उसे पीजीआई रेफर कर दिया गया। 

हादसे का पता चलने पर पुलिस मौके पर पहुंच गई। थाना साढौरा के कार्यवाहक एसएचओ ने लापरवाही से वैन चलाने के जुर्म में पि्रंसिपल व स्कूल संचालक बलजीत सिंह को गिरफ्तार कर लिया तथा वैन को अपने कब्जे में ले लिया। पुलिस द्वारा मांगे जाने पर स्कूल संचालक न तो गाड़ी के कागजात और ना ही अपना ड्राइविंग लाइसेंस प्रस्तुत कर सका। 

जांच अधिकारी एएसआई बलवान सिंह ने बताया कि नियमों को ताक पर रख कर क्षमता से अधिक बच्चों को वैन में बिठाया हुआ था। जिसके कारण से ही वाहन चालक पि्रंसिपल वैन पर से अपना नियंत्रण खो बैठा। प्रिंसिपल के पास न तो ड्राइविंग लाइसेंस है न ही गाड़ी के कागजात।
 
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