पांच पंचायतों को मिले थे 285,15,84,554 रुपये
विजिलेंस ब्यूरो के एक प्रवक्ता ने बताया कि अमृतसर-कोलकाता डेटिकेटेड फ्रट कॉरिडोर प्रोजेक्ट के तत पुडा ने उक्त पांच गांवों की कुल 1103 एकड़, 3 कनाल, 15 मरले जमीन अधिगृहित की गई थी। इसके एवज में गांव आकड़ी, गांव सेहरा, गांव सेहरी, गांव तख्तूमाजरा और गांव पबरा की पंचायतों को जमीन का मुआवजा 285,15,84,554 रुपये दिया गया। इसके अलावा इस जमीन के काश्तकारों को 9 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से 97,80,69,375 रुपये भत्ता मिला था।
गांववासियों ने दी थीं विकास कार्यों संबंधी शिकायतें
पंचायतों द्वारा करवाए गए विकास कामों संबंधी गांववासियों द्वारा शिकायतें की गई थीं। इनमें आरोप लगाया गया था कि पंचायती विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों ने विकास कार्य ठीक ढंग से नहीं करवाए हैं। इसके बाद इन कामों की तकनीकी टीम से जांच करवाई गई। इस दौरान विकास कार्यों में भारी कमियां मिलीं। जांच में सामने आया कि गांव आकड़ी और गांव सेहरी की पंचायत ने बिना काम करवाए बड़ी रकमों की अदायगियां कर करोड़ों रुपये का घपला किया है। इस रिपोर्ट के आधार पर उक्त गोवों के जिम्मेदार सरपंचों, पंचों और अन्य आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।