लोकसभा चुनाव के दौरान जीएसटी के 3बी रिटर्न भरने में फर्मों ने बड़े घपले किए। मार्च से मई तक राजस्व में अचानक कमी आने से एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट एक्शन में आ गया। जांच-पड़ताल के बाद विभाग ने करीब 1200 फर्मों को नोटिस जारी कर दस्तावेज तलब किए हैं। विभाग ने दस्तावेजों की जांच के बाद करीब 100 फर्मों में 4 करोड़ 62 लाख से अधिक ब्याज के रूप में घपला पकड़ा है। एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट ने व्यापारियों को नोटिस भेजकर जल्द ब्याज जमा करने को कहा है।
ऐसा नहीं करने पर डिपार्टमेंट फर्मों के रजिस्ट्रेशन कैंसिल करने की कार्रवाई करेगा। इस संदर्भ में असिस्टेंट एक्साइज एंड टैक्सेशन कमिश्नर आरके चौधरी ने बताया कि पिछले दो साल में जीएसटी 3बी रिटर्न देर से भरने वाले करीब 100 व्यापारियों पर ब्याज लगाया गया है। यह ब्याज 4 करोड़ 62 लाख रुपये बनता है। रिटर्न में देरी करने वाले व्यापारियों की लिस्ट तैयार की जा रही है। उनका कहना है कि इसका खुलासा तब हुआ, जब चुनाव के दौरान फर्मों की ओर से जीएसटी भरने में गड़बड़ी की गई।
अचानक राजस्व में कमी आने के बाद 1200 से अधिक फर्मों को नोटिस भेजकर दस्तावेज तलब किए गए। दस्तावेजों की जांच पड़ताल के बाद पता चला कि कई फर्में लंबे समय से जीएसटी रिटर्न भरने में देरी कर रही हैं। विभाग ने जांच के बाद देर से रिटर्न के लिए एक सौ से अधिक फर्मों को नोटिस जारी कर ब्याज का बकाया जल्द जमा करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही विभाग ने फर्मों को निर्देश दिए हैं कि यदि वह समय से ब्याज नहीं भरती हैं तो संबंधित फर्मों को निरस्त करने की कार्रवाई शुरू हो जाएगी।
डिपार्टमेंट की ओर से डीलर्स की लिस्ट बनाई गई है, जिसमें 1200 से अधिक नाम शामिल हैं। इन डीलरों पर जीएसटी जब से लागू हुआ है यानी 2017-18 और 2018-19 के समय से 3बी रिटर्न समय पर न भरने पर ब्याज लगाया जाएगा।