देश के बैंकों में जमा लोगों की पूंजी के दुरुपयोग को प्रभावी तरीकों से रोकने के लिए वित्तीय वर्ष के ऑडिट में चार्टर्ड एकाउंटेंट्स (सीए) की भूमिका अहम होती है। ऑडिट अवधि के दौरान सीए अपनी जिम्मेदारियों को बेहतर तरीकों से निभाये और देश की अर्थव्यवस्था को और मजबूती देने में योगदान दें।
यह विचार मंगलवार को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के चीफ जनरल मैनेजर (सीजीएम) अनिल किशोर ने सीए संघ ‘द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) द्वारा आयोजित ‘सेमिनार ऑन स्टेच्यूरी बैंक ऑडिट’ में बतौर मुख्य अतिथि कहे।
सेक्टर-35 स्थित होटल में आयोजित सेमिनार में करीब 400 सीए और बैंक अधिकारियों ने हिस्सा लिया। सेमिनार में भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से ऑडिट के लिए जारी गाइडलाइंस के बारे में जानकारी दी गई। यह सीए देश के कोने-कोने में फैले करीब 250 बैंकों की विभिन्न शाखाओं में ऑडिट करेंगे।
सीजीएम किशोर ने कहा कि भारतीय बैंकों के अधिनियम और ऑडिटिंग मापदंड विश्व के अन्य देशों के मुकाबले बहुत कड़े हैं और इसी वजह से हमारी एकाउंटिंग प्रक्रिया को काफी सुरक्षित माना है। भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों में काफी सख्ती है।
यह कड़े दिशा-निर्देश देश के हित के लिए ही हैं, जिसकी आलोचना नहीं की जानी चाहिये। ऑडिट होने वाले बैंक भी अपना पूर्ण सहयोग देते रहें। इससे पूर्व नवनिर्वाचित चेयरमैन सीए नवीन सोनी ने देश की अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूती देने के लिए बैंक ऑडिट के महत्व पर जानकारी दी।
उन्होंने बैंक ब्रांच ऑडिट प्रक्रियाओं में हो रहे नवीनतम बदलावों, उनमें आ रही चुनौतियों तथा उनके समाधानों की भी जानकारी दी। इस अवसर पर नई दिल्ली से आए सीए रमेश ए शेट्टी ने ‘ऑडिट प्लानिंग एंड डाक्यूमेंटेशन’ के तहत बैंक ऑडिट के महत्वपूर्ण पहलुओं से अवगत करवाया। वहीं इलाहाबाद बैंक के सीए एसके अरोड़ा ने ‘एलएफएआर रिपोर्टिंग’ के बारे में जानकारी दी।