सेव सुखना मामले में रुड़की के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी की फाइनल रिपोर्ट चंडीगढ़ प्रशासन की कंजूसी से रुक गई है।
हाईकोर्ट में चल रहे इस मामले में संस्थान ने प्रशासन पर आरोप जड़ा है कि यूटी प्रशासन रिपोर्ट के एवज में संस्थान को चुकाए जानी वाली इंसटालमेंट की किश्त को रिलीज नहीं कर रहा है।
संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. सोहास ने प्रशासन को लिखे पत्र में कहा है कि इंसटालमेंट की तीसरी किश्त जारी होते ही फाइनल ड्राफ्ट रिपोर्ट जारी कर दी जाएगी।
मामले की सुनवाई के दौरान चंडीगढ़ प्रशासन ने अपना पक्ष रखने के लिए हाईकोर्ट से कुछ मोहलत का आग्रह किया, जिसे चीफ जस्टिस संजय किशन कौल पर आधारित खंडपीठ ने स्वीकार कर लिया।
मामले की सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार की तरफ से एमिकस क्यूरे तनु बेदी पर हमला वोला। हरियाणा सरकार के वकील ने कहा कि एमिकस क्यूरे झील के फीडर चैनल में गंदगी होने की बात उठा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि चैनल में कोई भी गंदगी नहीं है और वहां पर स्थानीय प्रशासन पूरा चैक रखे हुए है। इस मामले में हरियाणा सरकार के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के डीजी अनुराग रस्तोगी की तरफ से हलफनामा भी पेश किया गया।
संस्थान की तरफ से हाईकोर्ट को आश्वस्त किया गया है कि संस्थान इस प्रोजेक्ट में बड़ी गंभीरता से जुटा हुआ है। संस्थान ने सुखना के संरक्षण के लिए पूर्व में जारी रिपोर्ट में कई सुझाव दिए थे और इन सुझावों पर काम शुरू करने की सिफारिश की थी।