सतलोक आश्रम से रामपाल ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अपने समर्थकों का योजनाबद्ध तरीके से इस्तेमाल किया। आश्रम में घुसने के लिए केवल एक ही मुख्य द्वार है। इसलिए रामपाल ने आश्रम के मुख्य गेट के बाहर बुजुर्ग, युवा, महिला, बच्चों को बहुत व्यवस्थित तरीके से ड्यूटी पर लगाया ताकि पुलिस कर्मी किसी भी तरह से अंदर प्रवेश न कर सकें।
शिफ्टवाइज इन सभी की ड्यूटी लगाई गई। आश्रम के गेट पर करीब 2000 महिला, पुरुष और बच्चों को बैठाया गया, जो दिन और रात में बदलते रहते थे। इसके बाद चार से पांच हजार अनुयायी और निजी कमांडो आश्रम की छतों पर तैनात किए गए। यह भी आठ से दस घंटों में बदलते रहते।
संत के अनुयायी रिटायर्ड फौजी और पुलिसकर्मी अंदर बैठकर इस योजना को अंजाम दे रहे थे। वह एक तरफ तो जहां कमांडो को पुलिस पर हमला करने का प्रशिक्षण दे रहे थे वहीं, महिलाओं को भी महिला पुलिस से सामना करने का तरीका भी बता रहे थे।
ऐसे बनी लोगों के इस्तेमाल की योजना
आश्रम के फ्रंट गेट पर सबसे पहले बच्चों को बिठाया गया। यह बच्चे महिलाओं के बीच में घुले मिले होने के कारण स्पष्ट नहीं हो पा रहे थे। उनके पीछे महिलाओं और युवतियों को तैनात किया गया।
इनमें ऐसी महिलाओं को प्रमुखता दी गई जिनके छोटे-छोटे बच्चे हों। ताकि पुलिस कार्रवाई से बचे। इनके पीछे बुजुर्ग महिलाएं और पुरुष बैठाए गए, इनकी संख्या कम ही रखी गई।
इन सब के पीछे युवाओं की एक टोली बैठी थी, जो आश्रम की दीवार से सटे हुए थे। यहीं पर पेट्रोल बम, डीजल, तेजाब के पाउच आदि रखे हुए थे। जैसे ही पुलिस ने कार्रवाई शुरू की इन लोगों ने पुलिस पर पेट्रोल बम आदि फेंकना शुरू कर दिया।
पांचवें चरण में आश्रम के छत पर चार से पांच हजार युवाओं को तैनात किया गया। इनमें बाबा के निजी कमांडो भी थे। यह राइफल, बंदूक, रिवॉल्वर, पेट्रोल बम, तेजाब के पाउच आदि से हमला करने के लिए तैयार थे।