वो स्वस्थ और खुशहाल जिंदगी जीना चाहती थी लेकिन बीमारी से तंग आ चुकी थी, इसलिए सतलोक आश्रम में इलाज कराना शुरू किया लेकिन नहीं पता था कि यही आश्रम एक दिन उसकी सांसें ही छीन लेगा।
यह दर्दनाक दास्तां है संगरूर के कस्बा शेरपुर की मलकीत कौर उर्फ भजन कौर की। मंगलवार को हरियाणा के बरवाला में पुलिस और संत रामपाल के समर्थकों के बीच हुई झड़पों में मलकीत कौर की जान चली गई।
मलकीत कौर (50) की मौत की खबर जैसे ही शेरपुर पहुंची तो इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों ने बताया कि भजन कौर लंबे अरसे से डेरे से जुड़ी हुई थी। वह अक्सर सतलोक आश्रम आती-जाती रहती थी। वह वहां से किसी बीमारी का इलाज भी करा रही थी।
दस दिन पहले ही वह वहां अपनी दवा लेने गई थी, मगर उसे क्या पता था कि वहां दवा के बदले मौत मिल जाएगी। गांववासियों के मुताबिक भजन कौर के पारिवारिक सदस्य आश्रम में चल रही हिंसा से काफी चिंतित थे और उन्होंने कई बार भजन कौर से संपर्क करने की कोशिश भी की, लेकिन उनका उससे संपर्क नहीं हो पाया।
बुधवार को पारिवारिक सदस्यों को भजन कौर की मौत की खबर मिली और वह अपने रिश्तेदारों के साथ भजन कौर का शव लाने के लिए बरवाला की तरफ रवाना हो गए।