हरियाणा में सरस्वती की धारा एक बार फिर से फूट पड़ी है। प्रदेश के यमुनानगर जिले में खुदाई का काम चल रहा है और आज भी कई जगहों से पानी की धारा निकली है। यमुनानगर के गांव रुहालाडी में आज खुदाई के दौरान सरस्वती की धारा फूट पड़ी। इससे लगता है कि सरस्वती की धारा को पुन: पृथ्वी पर लाने के वर्षों से चल रहे भगीरथ प्रयास अब सफल होते दिखाई दे रहे हैं।
मंगलवार को भी आदिबद्री से पांच किलोमीटर दूर मुगलवाली गांव में सरस्वती के बहाव क्षेत्र में खुदाई के दौरान नदी का जल निकल आया है। आठ से दस फुट की खुदाई में जगह-जगह जल की धारा फूट रही है। प्रशासनिक अफसरों का दावा है यहीं सरस्वती नदी बहा करती थी और यह जल सरस्वती का ही है।
इतनी कम गहराई पर नीली बजरी, चमकदार रेत और खनिज के मिश्रण वाला यह पानी हुबहू नदियों में बहने वाले पानी की तरह लग रहा है। आला अधिकारियों ने इसकी पुष्टि के लिए यहां एक-एक करके करीब 10 गड्ढे खोदे और हर जगह समान अनुपात में पानी फूट पड़ा।
मुगलवाली पहुंचे डीसी डॉ. एसएस फुलिया और जिला प्रशासन के अन्य अधिकारी जमीन से निकले जल को देखकर रोमांचित हो उठे। इसके बाद डीसी, एसडीएम और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने भी खुद कस्सी से खुदाई कर इसकी जांच की।
राजस्व रिकॉर्ड में है सरस्वती का अस्तित्व
डीसी ने कहा कि सरस्वती नदी का जिक्र पुराणों में मिलता है और राजस्व रिकार्ड में भी इसका अस्तित्व रहा है। आज यह नदी हकीकत में धरती पर अवतरित होती दिखाई दे रही है। उन्होंने बताया कि 21 अप्रैल को जिला प्रशासन की ओर से इस नदी की खुदाई शुरू करवाई गई थी।
कुछ लोगों ने इस घटना को मिथ माना था परंतु सरस्वती शोध संस्थान के प्रमुख दर्शन लाल जैन ने इस पर कड़ी मेहनत की और आज यह भ्रांति सच्चाई में बदल गई है। उन्होंने बताया कि आदिबद्री को सरस्वती नदी का उद्गम स्थल माना गया था और यहां से पांच किलोमीटर दूर गांव रूलाहेड़ी में इस नदी की खुदाई शुरू की गई थी।
उन्होंने कहा कि गांव छलौर में एक बड़ा जलाशय बनाया जाएगा, जिसमें पहाड़ों पर होने वाली बरसात और सोम नदी के पानी को इकट्ठा कर सरस्वती नदी को एक बड़ी नदी के रूप में प्रवाहित किया जाएगा।
प्रचुर मात्रा में निकल रहा है पानी: डीडीपीओ
डीडीपीओ गगनदीप सिंह ने बताया कि 15 दिनों के अंदर लगभग तीन किलोमीटर की खुदाई की जा चुकी है। सोमवार को कुछ-कुछ जगहों पर पानी की बूंदे रिस रही थीं और मंगलवार को करीब आठ-दस फुट की गहराई पर प्रचुर मात्रा में पानी फुट पड़ा।
उन्होंने बताया कि सरस्वती नदी के आस-पास के नलकूपों में 85 फुट तक पानी नहीं है परंतु यहां आठ-दस फुट पर पानी होना सरस्वती के प्रति एक नया विश्वास उत्पन्न करता है।
इस अवसर पर बिलासपुर की एसडीएम पूजा चावरियां, तहसीलदार टीआर गौतम, एसडीओ पंचायती राज एसके गोयल सहित प्रशासन के अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।
ओएनजीसी निकालेगी सरस्वती नदी का जल
वर्ष 2007 में प्रदेश सरकार ने सरस्वती नदी के जल को धरा पर लाने का जिम्मा ऑयल एंड नेचुरल गैस कारपोरेशन को सौंपा था, लेकिन ओएनजीसी को प्रदेश सरकार से पर्याप्त सहयोग न मिलने के कारण यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट अधर में लटक गया था। केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद ओएनजीसी ने एक बार फिर नए सिरे से जमीन के नीचे सरस्वती नदी की खोज का जिम्मा उठाया।
इसके लिए ओएनजीसी के अधिकारी आदिबद्री और आसपास के क्षेत्र का सर्वे किया और प्रशासनिक अधिकारियों की मदद से खुदाई शुरू करवाई। दर्शनलाल जैन ने बताया कि अब ओएनजीसी द्वारा जल्द ही जिले में पांच-छह स्थानों पर गहराई में ड्रिल कर सरस्वती नदी का पानी बाहर निकाला जाएगा।
नासा और इसरो की ओर सैटेलाइट से लिए गए चित्रों और राजस्व अभिलोखों के आधार पर यहां सरस्वती की धारा की तलाश में खुदाई शुरू करवाई गई। यहां खुदाई के बाद जगह-जगह धारा फूट रही है, यह सरस्वती नदी का ही जल है। अब इसके आगे भी खुदाई कर धारा की तलाश की जाएगी।
डॉ एसएस फूलिया, डीसी, यमुनानगर
सरस्वती नदी के जल के श्रोत पहले भी मिलते रहे हैं। हरियाणा में आदिबद्री में प्रवाह क्षेत्र में खुदाई चल रही है, यहां मिलने वाला जल सरस्वती नदी का हो सकता है, क्योंकि अभी भी बहाव वाले क्षेत्र में कई श्रोत मौजूद हैं।
राजेंद्र सिंह राणा, पुरातत्वविद्