मंत्री शेखावत ने कहा कि दोनों प्रदेशों के एओयू होना शेष है। साथ में डैम व बैराज की तकनीकी चित्रण बाकी है। जिसके लिए मार्च 2021 तक का समय निर्धारित किया गया है सीडब्लूसी तकनीकी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी व दोनों प्रदेश अपने एमओयू क्लीयर होने पर पूरे प्रोजेक्ट पर कार्य शुरू करेंगे।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्रधिकरण ने भी कार्य कर सरस्वती की प्रमाणिकता की बात कही है। भारत की पौराणिक सभ्यत ही विकास का आधार है। सिंधु और सरस्वती सभ्यता पूरे विश्व में भारतीय सभ्यता के रूप में जानी जाती है। हरियाणा सरकार सरस्वती नदी के उद्धार पर कार्य कर रही है। जल्द ही दो बांध व बैराज बना जाएंगे। इससे दो सौ किलोमीटर तक नदी का प्रवाह शुरू हो जाएगा।
भू विज्ञान के प्रमाण है कि सरस्वती नदी का प्रवाह कच्छ था। जोधपुर, जसलमेर में भी सरस्वती पर शोध हुआ है। भू-गर्भ के जल से सरस्वती नदी का पानी आज भी लोग निकाल कर उपयोग में ले रहे हैं।
केंद्रीय जल शक्ति राज्यमंत्री रतनलाल कटारिया इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार से मिलने वाले हर सहयोग में दोनों राज्यों के अधिकारियों के संपर्क में रहेंगे। नदी के लिए हिमाचल प्रदेश क्षेत्र से 20 क्यूसेक जल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी और इसके लिए काठगढ़ क्षेत्र में 400 एकड़ पंचायती भूमि पर जल भंडारण परियोजना भी तैयार की जा रही है।