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सदियों पहले लुप्त हुई सरस्वती फिर से बहेगी, राजस्व रिकॉर्ड मिला

Thu, 11 Feb 2016 03:11 PM IST
नसीब सैनी/अमर उजाला, कैथल
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सदियों पहले लुप्त हो चुकी सरस्तवती नदी फिर से जमीन पर बहेगी और लोगों को मोक्ष देगी। इस नदी की जमीन ढूंढ ली गई है। जल्दी ही खुदाई शुरू हो जाएगी। हरियाणा सरकार ने तीन जिलों में सरस्वती के नाम से राजस्व रिकॉर्ड की करीब 260 किलोमीटर लंबाई में जमीन का पता लगाया है जिसकी खुदाई की जाएगी।
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साथ ही राजस्थान और गुजरात सरकार से बातचीत कर गुजरात के कच्छ तक करीब 1500 किलोमीटर लंबी सरस्वती नदी की धारा को पुनर्जीवित करने की प्लानिंग है। सरकार की ओर से नदी के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाने के लिए तीन दिवसीय उत्सव मनाया जा रहा है। इसके तहत शुरू की गई प्रदर्शनी वैन आज कैथल पहुंचेगी।

यमुनानगर में नदी की खुदाई भी शुरू कर दी गई है। हजारों साल पहले हिमाचल की तलहटी में आदिबद्री से शुरू होकर सरस्वती नदी का प्रवाह गुजरात के कच्छ तक था। जहां से यह समुद्र में मिल जाती थी। इसके किनारों पर ऐतिहासिक नगर एवं सभ्यताएं विकसित हुईं। बताया जाता है कि सिंधू घाटी सभ्यता से पहले सरस्वती घाटी सभ्यता भी रही है जिसमें सरस्वती नदी का काफी महत्व रहा है।
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तीन जिलों में 250 किलोमीटर लंबी नदी का राजस्व रिकॉर्ड

वेद, पुराणों समेत धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के ग्रंथों में सरस्वती का जिक्र मिलता है। समय के साथ-साथ इसकी धारा सूखने पर इसका ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व कम हुआ लेकिन सदियों से लोगों के विचारों, कथाओं एवं ऐतिहासिक प्रमाण में सरस्वती का जिक्र रहा।

यह सरस्वती का वजूद होने का सुबूत ही है कि आज भी हरियाणा के राजस्व विभाग में सरस्वती के नाम से जमीन है। सरकार द्वारा गठित सरस्वती विकास बोर्ड के प्रयासों से तीन जिलों यमुनानगर, कुरुक्षेत्र एवं कैथल में नदी के नाम से करीब 260 किलोमीटर लंबी नदी का रिकॉर्ड मिला है।

यमुनानगर में तो इस प्रवाह के अनुसार खुदाई भी शुरू कर दी है। सरकार की नदी के इस इलाके में खुदाई करके सरस्वती को पुनर्जीवित करने एवं इसके ऐतिहासिक महत्व को फिर से लौटाने की प्लानिंग है जिसके लिए यदि जरूरत पड़ी तो आसपास के एरिया की जमीन का अधिग्रहण भी हो सकता है।
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नासा व इसरो भी बता चुके हैं भूमिगत पानी का चैनल

नासा और इसरो जैसी संस्थाओं ने उपग्रह से लिए गए चित्रों के आधार पर विश्लेषण में भी यह दावा किया है कि सरस्वती के मार्ग के अनुसार भूमिगत पानी का अथाह चैनल है। यहां भूमि के नीचे जल धारा प्रवाहित हो रही है।

कैथल के कलायत में अलौकिक जल भी मिल चुका है। वहीं देश के प्राचीन नक्शे में भी इस नदी का जिक्र मिलता है तो अब राजस्व रिकॉर्ड पता करवाया गया तो रिकॉर्ड में भी इस नदी के नाम से भूमि मिली है।

गुजरात और राजस्थान सरकार से की जाएगी बातचीत
सरस्वती विकास बोर्ड के चेयरमैन प्रशांत भारद्वाज का कहना है कि सरस्वती नदी की धारा को पुनर्जीवित किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश के तीन जिलों में करीब 260 किलोमीटर लंबी नदी के नाम से पड़ी जमीन का पता लगाया गया है।

राजस्थान की मंत्री यहां का दौरा भी कर चुकी हैं। गुजरात के कच्छ तक इसकी धाराओं को जोड़ते हुए पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जाएगा। दोनों राज्यों की सरकारों से भी बातचीत की जाएगी।
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