देशद्रोह के मामले में कानूनी शिकंजे में फंसे रामपाल और उसके अनुयायियों का निकल पाना मुश्किल है। पुलिस प्रशासन ने दावा किया है कि रामपाल के खिलाफ देशद्रोह मामले में पुख्ता सुबूत हैं। इन सुबूतों के आधार पर पुलिस आसानी से आरोप तय कर सकती है। पुलिस की मानें तो फारेंसिक टीम ने मौके से जो जरूरी सबूत एकत्रित किए हैं, उनके बारे में एनआईए (नेशनल इनवेस्टिगेशन एजेंसी) से चर्चा हो चुकी है। एनआईए ने इसे सराहा भी है।
लाइसेंसी हथियार करवा देते थे अनुयायी
पुलिस की माने तो जांच में यह सामने आया है कि जो हथियार सतलोक आश्रम में मिले थे, उनमें से कई लाइसेंसी भी थे। लाइसेंस धारक हथियार खरीदकर उन्हें आश्रम में जमा करवा देते थे। आश्रम के मेन गेट के साथ ही एक लॉकर बना था। इन लॉकरों में सभी हथियार रखे जाते थे।
कानपुर पहुंचकर जांच कर रही है टीम
पुलिस ने जो हथियार पकड़े हैं, वे कानपुर से लाए गए हैं। पुलिस की एक टीम कानपुर पहुंची हुई है। कानपुर से लाए गए हथियारों के बारे में और जिन लोगों ने वहां से खरीदे हैं, उसका रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है।
वाटर टैंक करवाए खाली, नहीं मिली कोई सामग्री
सतलोक आश्रम में पुलिस ने वाटर टैंक भी खाली करवा दिए हैं। इन वाटर टैंकों से पुलिस को कुछ नहीं मिला है। एसपी सतेंद्र कुमार गुप्ता ने बताया कि आश्रम का दस प्रतिशत हिस्सा सर्च अभियान से अभी अछूता है।
रामपाल का और भी लिया जा सकता है रिमांड
पुलिस कप्तान सतेंद्र कुमार गुप्ता की मानें तो रामपाल जांच में कम ही सहयोग कर रहा है। फाइनेंशियल, कमांडो ट्रेनिंग और हथियारों के बारे में वह ज्यादा कुछ नहीं बताता। पुलिस ने बताया है कि पुलिस गहनता से जांच कर रही है। कुछ परतें और खोलने के लिए पुलिस रामपाल का और भी रिमांड मांग सकती है।
दौलतपुर आश्रम था बिस्तर हाउस
सतलोक आश्रम से कुछ ही दूरी पर बने दौलतपुर आश्रम को रामपाल का बिस्तर हाउस कहा जा सकता है। जांच एजेंसी ने रिपोर्ट में कहा है कि इस आश्रम में रजाइयां, गद्दे बनाने और स्टोर करने का काम किया जाता था। दोनों आश्रमों में करीब 70 हजार से अधिक रजाई-गद्दे पड़े हैं।