संत रामपाल की सलाखों के पीछे पहली रात नींद उड़ी रही और बेचैनी की हालत में उनका वक्त गुजरा। उनकी बातों और हावभाव से लग रहा है कि जैसे अब वे सारे घटनाक्रम पर पछतावा कर रहे हो।
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रामपाल गिरफ्तार होने के बाद बृहस्पतिवार रात सिविल लाइन थाने की हवालात में कभी उठकर बैठ जाते तो कभी टहलने लग जाते। जमीन पर बिछे कंबल पर उन्हें नींद नहीं आई। कोर्ट में पेशी के बाद उन्हें सिविल लाइन थाने ले जाया गया था। सुबह सात बजे उन्होंने एक चाय पी, कुछ देर बाद एक चाय और पी और सुबह 10 बजे संत रामपाल ने एक रोटी और दाल खाई।
मिनरल वाटर पीने वाले संत ने थाने के ही फिल्टर वाटर का पानी पिया। जब उनसे पुलिस कुछ पूछती तो वह केवल एक ही जवाब देते कि बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है, तब ऐसा ही होता है।
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जेल में रामपाल पूरी तरह भयभीत
संत ने अपने नियमित समय के अनुसार ही खाना खाया। पुलिस को उन्होंने कहा कि वह सुबह दस बजे एक रोटी और दाल लेते हैं, शाम को वे सात बजे एक रोटी और सब्जी खाते हैं।
उन्होंने एक चाय शुक्रवार दोपहर करीब तीन बजे और दूसरी साढ़े पांच बजे पी। रामपाल पूरी तरह से भयभीत हैं, कभी बड़बड़ाने लग जाते हैं तो कभी योग मुद्रा में बैठ जाते हैं। उनको डर है कि कहीं पुलिस उनसे मारपीट न करने लग जाए। भयभीत बाबा को बार-बार बेचैनी होने लगती है, वे उठकर फिर हवालात में ही इधर-उधर टहलने लग जाते हैं। हालांकि शारीरिक रूप से वे स्वस्थ हैं।
पहले दिन संत रामपाल से कोई विशेष पूछताछ नहीं हुई। किसी को हवालात की तरफ नहीं जाने दिया जा रहा। थाने के गेट पर पुलिस ने कड़ा पहरा लगाया हुआ है। पुलिस ने संत रामपाल से कुछ देर पूछताछ की।
रामपाल से सुबह करीब 10 बजे पूछताछ की गई, जब खाने की इच्छा जाहिर की तो उनके लिए थाने की मैस से एक रोटी और दाल मंगवाई गई। इसी दौरान कुछ पुलिस कर्मचारियों ने उनसे पूछताछ की।
पुलिस: बाबा केवल एक रोटी से पूरा दिन कैसे काम चलता है? रामपाल: मैं दोनों टाइम एक-एक रोटी ही खाता हूं, सुबह दस बजे और शाम सात बजे। सवाल: बाबा आप काजू-बादाम खाने वाले हो, अब दाल रोटी खा रहे हो, ऐसी परिस्थितियां क्यों बनी, जो आपको यह कष्ट उठाने पड़े? जवाब: जब बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है, तब ऐसा ही होता है, मेरी भी बुद्धि भ्रष्ट हो गई थी। सवाल: बाबा आपने हमारे 200 जवानों को चोट मरवा दी, क्या हम पाकिस्तान के हैं? जवाब: रामपाल हाथ मलने लगे, मुझे पता ही नहीं था, बाहर क्या चल रहा है। सवाल: क्या आप टीवी चैनल, अखबार पढ़कर भी नहीं जान पाए? जवाब: इस पर बाबा ने कोई जवाब नहीं दिया, वे चुप हो गए। सवाल: बाबा आपको सब पता था, आप खुद ऐसा चाहते थे? जवाब: जब समय आया तो भगवान श्रीकृष्ण से भी युद्ध नहीं टाला गया, मेरा भी यह समय खराब है। सवाल: बाबा आपके आश्रम में रेप जैसी शर्मनाक घटनाएं सुन रहे हैं? जवाब: पिछले दो-तीन दिनों से कंट्रोल मेरे हाथ से छूट गया था, मेरा जोर नहीं चला, क्या कुछ हुआ मुझे नहीं पता, अव्यवस्था फैल गई थी। सवाल: आप खुद क्यों नहीं बाहर आए? जवाब: मुझे भी अंदर बंधक बना लिया गया था, जब मैं छूटा तो बाहर निकल आया।