चंडीगढ़। संकट चतुर्थी 17 जनवरी को है। आयुष्मान योग और सर्वार्थ सिद्धि योग में चतुर्थी तिथि का प्रवेश होगा। इसमें मघा व पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और सौभाग्य योग का पवित्र संयोग बन रहा है। यह योग आयु में वृद्धि करने वाला और सुख संपत्ति प्रदान करने वाला है। यह कहना है देवालय पूजक परिषद के सलाहकार और सेक्टर-28 के खेड़ा शिव मंदिर के प्रमुख पुजारी ईश्वर चंद्र शास्त्री का। उन्होंने कहा कि 17 जनवरी को रात्रि 9.09 बजे चंद्रोदय होगा। ओम् सों सोमाय नमः मंत्र से चंद्रमा को अर्घ्य दें।
उन्होंने कहा कि भारतवर्ष त्योहारों व पर्वों का देश है। हिंदू सनातनी त्योहारों में गणेश संकट चतुर्थी का पर्व भी अपनी विशेषता रखता है। इसे संकट चौथ के नाम से भी जाना जाता है। माघ मास के कृष्ण पक्ष की चंद्रोदय व्यापिनी तिथि में यह व्रत किया जाता है। माताएं पुत्र की दीर्घायु के लिए संकट चौथ व्रत करती हैं। पुरुष, महिला, विद्यार्थी कोई भी इस व्रत को कर सकते हैं। यह व्रत भगवान गणपति को समर्पित है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्रत करने वाले के सारे विघ्न-संकट दूर हो जाते हैं।
चंद्रमा को अर्घ्य के बाद होता है पारण
ईश्वर चंद्र शास्त्री ने बताया कि संकट चतुर्थी का व्रत 17 जनवरी शुक्रवार को रखा जाएगा। यह व्रत चंद्रोदय तक होता है। चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है। चतुर्थी तिथि 17 जनवरी को प्रातः 4 बजकर 05 मिनट पर प्रारंभ होगी और अगले दिन 18 जनवरी को सुबह 5 बजकर 29 मिनट पर समाप्त होगी।
यह है पूजा विधि
श्री देवालय पूजक परिषद चंडीगढ़ के अध्यक्ष और सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि सुंदर चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें। पंचामृत व गंगाजल से गणेश जी को स्नान कराएं। वस्त्र, यज्ञोपवीत, तिलक, चंदन, पुष्प और हरी दूर्वा आदि से पूजा करें। भगवान गणपति को लड्डुओं का भोग अवश्य लगाएं। तिल और गुड़ के लड्डू लें। पान, फूल, फल और मेवा से भगवान की पूजा करने के बाद आरती उतारें। ओम् गं गणपतये नमः इस मंत्र का जाप करें। गणपति अथर्वशीर्ष आदि स्तोत्रों का पाठ करें। चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद अपने माता-पिता, सास, ससुर व बड़ों को प्रणाम करें। सात्विक भोजन से व्रत का पारण करें। इस प्रकार व्रत व पूजा करने से भगवान गणपति की कृपा प्राप्त होती है। भगवान गणपति सब प्रकार के संकटों व विघ्नों को दूर करते हैं। सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं। आयु में वृद्धि करते हैं।