चंडीगढ़। सेक्टर-37 में करोड़ों की कोठी पर कब्जा करने के मामले में मंगलवार को डीएसपी रामगोपाल की एसआईटी के सामने पेशी हुई। पुलिस ने उनसे केस से जुड़े कई सवाल किए। डीएसपी ने मामले में अपनी संलिप्तता से इनकार करते हुए कहा कि वह नहीं जानता, कोठी का सौदा कब और कहां हुआ। दूसरी ओर, मामले में गिरफ्तार पत्रकार संजीव महाजन व मनीष गुप्ता को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया, जबकि डीएसपी रामगोपाल के भाई सतपाल डागर का दो दिन का रिमांड मंजूर कर लिया।
एसआईटी की अगुवाई कर रहीं एएसपी श्रुति अरोड़ा के सेक्टर 34 स्थित दफ्तर में मंगलवार सुबह करीब 11 बजे पहुंचे। श्रुति अरोड़ा ने बताया कि डीएसपी से केस के बारे में अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया। उनसे पूछा गया कि क्या आपके कार्यालय में राहुल मेहता की कोठी बेचने का सौदा हुआ था? इसके जवाब में डीएसपी रामगोपाल ने कहा कि मुझे इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि कोठी का सौदा कब और कहां हुआ? इसी तरह के अन्य सवाल भी उनसे पूछे गए, जिनके जवाब उन्होंने एसआईटी को दिए। इसके बाद उनके बयान को कलमबंद कर लिया गया। उन्हें इस ताकीद के साथ भेजा गया है कि जरूरत पड़ने पर दोबारा पूछताछ के लिए पेश होना होगा। श्रुति ने बताया कि अब डीएसपी के बयानों की जांच की जाएगी। बता दें कि डीएसपी रामगोपाल पर आरोप था कि पीड़ित राहुल मेहता की कोठी का सौदा उनके दफ्तर में हुआ था। पुलिस ने इस मामले में सेक्टर-39 के तत्कालीन थाना प्रभारी राजदीप सिंह को भी समन देकर बुधवार को एसआईटी के सामने पेश होने के निर्देश दिए हैं।
नकली राहुल मेहता तक पहुंचाएगा डागर
मंगलवार को अदालत में सुनवाई के दौरान पुलिस ने कहा कि कोठी बेचने के दौरान आरोपियों ने जिस व्यक्ति को फर्जी राहुल मेहता बनाकर रजिस्ट्रार के ऑफिस में खड़ा किया था, उसकी जानकारी सतपाल डागर के पास है। डागर को यह भी पता है कि वह इस समय कहां छिपा है? उसे पकड़ने में डागर मददगार साबित हो सकता है इसलिए उसका दो दिन का और रिमांड दिया जाए। अदालत ने पुलिस की इस अर्जी को स्वीकार कर लिया। अब पुलिस डागर को लेकर फर्जी राहुल मेहता के ठिकाने पर जल्द पहुंचेगी।
संजीव को अलग बैरक में रखने का निर्देश
सुनवाई के दौरान संजीव महाजन के वकील ने अदालत से कहा कि उनके मुवक्किल को जेल के अंदर जान का खतरा है इसलिए उन्हें दूसरे कैदियों से अलग रखा जाए। अदालत ने उनकी बात मान ली और जेल प्रशासन को संजीव को अलग बैरक में रखने के निर्देश दिए। पुलिस ने अदालत की मौजूदगी में संजीव महाजन व सतपाल डागर के हस्ताक्षर के सैंपल लिए ताकि दस्तावेज में दर्ज हस्ताक्षर का मिलान किया जा सके। सुनवाई के दौरान डागर के वकील विशाल गर्ग नरवाणा ने कहा कि उनके मुवक्किल का प्रॉपर्टी से कोई लेना-देना नहीं है। सतपाल को इससे कोई लाभ भी नहीं मिला है।
इन रसूखदारों की कब होगी गिरफ्तारी
इस मामले में पांच रसूखदार आरोपी शराब कारोबारी अरविंद सिंगला, शेखर, खलेंद्र सिंह कादियान, अशोक अरोड़ा, सौरभ गुप्ता अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। उन्हें गिरफ्तार करने के लिए पुलिस लगातार प्रयास कर रही है। वहीं, एक आरोपी बाउंसर सुरजीत सिंह की हत्या हो चुकी है।