मालेरकोटला में पशु वध की घटना के रोष में शनिवार को संगरूर मुकम्मल तौर पर बंद रहा। इस दौरान अलग-अलग हिंदु जत्थेबंदियों ने शहर में रोष प्रदर्शन कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की।
उल्लेखनीय है कि पिछले दो दिनों से मालेरकोटला की घटना के बाद संगरूर में रोष, प्रदर्शनों का दौर चल रहा है, जिसके चलते शनिवार को कई हिंदू जत्थेबंदियों की तरफ से संगरूर बंद रखने की अपील की गई थी और चेतावनी दी गई थी कि यदि बंद के दौरान किसी की दुकान खुली पाई गई तो उसके नुकसान की जिम्मेवारी उस दुकानदार की होगी।
पटियाला गेट, नाभा गेट, धूरी गेट, छोटा चौक, बड़ा चौक आदि इलाकों में एक भी दुकान नहीं खुली। रेहड़ी वालों ने भी अपनी रेहड़ियां नहीं लगाई। सुबह से ही हिंदू संगठनों के नेताओं ने अपने कार्यकर्ताओं के साथ शहर में रोष प्रदर्शन किया। उन्होंने हाथों में केसरी रंग के झंडे थामे हुए थे. इस दौरान उन्होंने कई खुली दुकानों को बंद भी कराया। इसके साथ ही सरकारी रणबीर कॉलेज और अन्य शिक्षण संस्थानों को भी प्रदर्शनकारियों ने बंद रखने की अपील की।
प्रदर्शनकारी स्टेशन पर शताब्दी को रोकने पहुंचे थे लेकिन ऐन मौके पर पुलिस पहुंच गई जिस कारण प्रदर्शनकारी ट्रेन को ज्यादा समय तक नहीं रोक पाए। बंद के दौरान एहतियात के तौर पर पुलिस पार्टी चप्पे-चप्पे पर नजर बनाए हुए थी। डीएसपी गुरप्रीत सिंह ढींढसा पुलिस पार्टी के साथ स्वयं शहर में गश्त करते देखे गए। प्रदर्शनकारियों के साथ-साथ पुलिस पार्टी भी चल रही थी।
कोई दवा तो कोई सामान के लिए भटका
संगरूर। शनिवार को संगरूर बंद के दौरान आम लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस दौरान दुकानें बंद रहने के कारण लोगों को जहां जरूरत का सामान नहीं मिल पाया, वहीं मेडिकल स्टोर बंद होने की वजह से लोगों को दवा लेने के लिए लिए इधर-उधर भटकना पड़ा।
नजदीकी गांव चंगाल के रहने वाले मुख्तयार सिंह संगरूर बाजार में खरीदारी करने आए थे, लेकिन उन्हें यहां आकर पता चला कि बाजार बंद है। सिविल अस्पताल में आए दर्शन सिंह, सरोज रानी ने बताया कि उन्हें अपने मरीज के लिए दवा की जरूरत है, लेकिन सभी मेडिकल स्टोर बंद पड़े हैं। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों को दवा की दुकानों को खुला रखने की इजाजत देनी चाहिए। वहीं बाजार में दुकानदार अपनी बंद दुकानों के सामने बैठे रहे, ज्यादातर दुकानदारों ने अपनी दुकानों के सामने ताश खेलकर समय गुजारा।