फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बाबाओं के ढोंग पर कटाक्ष मायादेवी का सांग

Mon, 20 Jan 2014 01:59 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,चंडीगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
हरियाणा के सूचना जनसंपर्क एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग की ओर से छह दिवसीय सांग उत्सव के पांचवें दिन टैगोर थियेटर में चंद्रबादी प्रणाली के सूरज बेदी सांगी के निर्देशन में मायादेवी सांग प्रस्तुत किया गया। इस सांग को देखकर दर्शकों ने खूब इंज्वाय किया।
विज्ञापन


इस महोत्सव के अंतिम दिन सोमवार को भगत ध्रुव सांग का आयोजन किया जाएगा। मायादेवी सांग तारागण शहर के राजा चंद्रगुप्त की बहन की कहानी है। राजा की बहन मायादेवी की सगाई सोनितपुर के राज रणतेज कंवर के साथ हुई थी। इस कहानी में चंद्रगुप्त का वजीर सत्यानंद खलनायक है।

कहानी में पहला मोड़ तब आता है जब चंद्रगुप्त को कोढ़ हो जाता है। ब्राह्मण उसे सलाह देते हैं कि वह हरिद्वार जाकर 41 दिन तक स्नान करे तो कोढ़ दूर हो जाएगा।
विज्ञापन


राजा अपना राजपाठ सत्यानंद को देकर हरिद्वार चला जाता है। एक दिन सत्यानंद खुद मायादेवी के महल में आता और उससे शादी का प्रस्ताव देता है। माया देवी इस प्रस्ताव सुनकर नाराज हो जाती हैं और उसे डांटकर भगा देती।

इससे सत्यानंद अपने आपको बेइज्जत महसूस करने लगता और मायादेवी से बदला लेने के लिए तरकीब निकालता। वह मायादेवी को बदनाम करने लगता। जब इस बारे में चंद्रगुप्त को पता चलता है तो वह हरिद्वार से महल के लिए निकलने का ऐलान करता। 

इस बीच इसकी सूचना सत्यानंद को मिल जाती है और वह एक ढोंगी बाबा को हरिद्वार भेजता है, जो चंद्रगुप्त को बताता है कि उसकी बहन का चाल-चलन ठीक नहीं है। यदि उसे खत्म कर दोगे तो आपका कोढ़ भी खत्म हो जाएगा। यह सुनकर चंद्रगुप्त महल के लिए निकल जाते हैं और महल पहुंचकर मायादेवी पर तलवार तान देता है।

इतने में वजीर पहुंचता है और उसकी तलवार रोक देता है। वह बताता है कि कन्या पर हाथ नहीं उठाना चाहिए। बाद में काठ के संदूक में बंदकर मायादेवी को बहा दिया जाता। एक जंगल में उसके संदूक को एक शख्स पकड़ लेता है और उसे खोलकर मायादेवी को बाहर निकालता। वह मायादेवी के जेवर ले लेता है और उसे छोड़ देता।

इतने में राजा रणतेज कंवर पहुंच जाते हैं और उसे छुड़ा देता है। कुछ दिन बाद मायादेवी व राजा रणतेज के बीच प्यार हो जाता है और दोनों शादी कर लेते हैं। उसके बाद राजा रणतेज सत्यानंद वजीर को मार देता।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें