बहुचर्चित समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट केस में एक नया मोड़ आ गया है, जिसके चलते कोर्ट की सुनवाई भी लंबे समय के लिए टल गई है। दरअसल केस में पाकिस्तानी नागरिकों की गवाही चार महीने के लिए टल गई है। पाकिस्तान ने मामले के गवाहों को पेश करने के लिए चार महीने का वक्त मांगा था, जिसके बाद अदालत ने सुनवाई के लिए 27 से 30 नवंबर की तारीख तय की है।
पंचकूला स्थित एनआईए की विशेष अदालत में पाकिस्तानी नागरिकों की 4 से 7 जुलाई के दौरान गवाही होनी थी। लेकिन कोई पाकिस्तानी नागरिक नहीं पहुंचा। अगली सुनवाई अब 11, 18 और 25 अगस्त को होगी। बचाव पक्ष के वकील मुकेश गर्ग ने बताया कि अदालत ने 13 पाकिस्तानी नागरिकों को समन किया था। जिनमें राणा शौकत अली और उसकी पत्नी रुख्साना सहित ट्रेन में घटना के दिन सफर करने वाले अन्य 11 यात्री शामिल हैं।
इनमें कुछ गवाह ऐसे हैं जिन्होंने अपने परिजनों के शवों की पहचान की थी, जबकि कुछ जख्मी हुए यात्री भी हैं। ब्लास्ट में शौकत और रुख्साना ने ट्रेन से छलांग लगाने वाले एक संदिग्ध को देखा था। इसी आधार पर संदिग्ध का स्केच भी तैयार किया गया, जिसकी शक्ल उस व्यक्ति से मिलती थी, जिसे घटना के बाद अमृतसर सीमा पर बगैर पासपोर्ट के पकड़ा गया था, लेकिन बाद में छोड़ दिया गया।
फरवरी, 2007 में पानीपत के दीवाना स्टेशन के पास समझौता एक्सप्रेस में हुए ब्लास्ट में रुख्साना और शौकत के छह बच्चों सहित कुल 68 यात्रियों की मौत हो गई थी। इनमें अधिकतर पाकिस्तान के थे। एनआईए के वकील आरके हांडा के अनुसार सभी पाकिस्तानी नागरिकों को गवाही के लिए दोबारा समन किया जाएगा। मामले में पाकिस्तान की ओर से चार महीने का वक्त मांगा गया था। जिसके बाद अदालत ने 27 से 30 नवंबर की तारीख गवाही के लिए तय की है।